देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read More
मथुरा(केके पाठक)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सोमवार को प्रात: दिव्य शहनाई एवं नगाड़ों के वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन हुए। तदोपरान्त भगवान का पंचामृत अभिषेक किया गया। भगवान के पवित्र स्त्रोतों का पाठ एवं पुष्पार्चन हुआ। प्रात: 10:00 बजे श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष पूज्यनीय महंत श्रीनृत्यगोपाल दासजी, महाराज एवं काष्र्णि गुरूशरणानन्दजी महाराज के भावमय सानिध्य में दिव्य पुष्पांजलि का कार्यक्रम श्रीकृष्ण जन्मस्थान के प्रसिद्ध लीलामंच पर संपन्न हुआ। श्रीकृष्ण जन्मस्थान संस्थान पर ठाकुरजी की महाआरती काष्र्णि गुरू शरणानन्द महाराज, महंत नित्य गोपालदास, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के साथ में हिन्दूवादी नेता गोपेश्वर चतुर्वेदी एवं जन्मस्थान के सचिव कपिल शर्मा आदि ने आरती उतारी।
जन्म महाभिषेक का मुख्य एवं अलौकिक कार्यक्रम रात्रि 11 बजे से श्रीगणेश-नवग्रह आदि पूजन से शुरू हुआ। रात्रि 12 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ संपूर्ण मंदिर परिसर में ढोल-नगाड़े, झॉंझ-मजीरे और मृदंग बज उठे। हरिबोल एवं करतल ध्वनि के साथ असंख्य भक्तजन भाव-विभोर हो उठे। संत एवं भगवान के जन्म की महाआरती शुरू हुई। ढोल एवं मृदंग अभिषेक स्थल के साथ-साथ संपूर्ण मंदिर परिसर में सुनाई दे रहा था। केसर आदि सुगन्धित द्रव्यों से लिपटे हुये भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह दिव्य रजत कमल-पुष्प में विराजमान हुए। जन्म महाभिषेक महोत्सव के दर्शन करने के लिए देव, देवाधिदेव, महादेव सहित 33 कोटि देवतागण उपस्थित रहते हैं। भगवान का प्रथम जन्माभिषेक स्वर्ण मण्डित रजत से निर्मित कामधेनु स्वरूपा गौमाता ने किया। शास्त्रीय मान्यता है कि गौमाता में स्वयं 33कोटि देवतागण वास करते हैं। राजस्थान के कुशल कारीगरों द्वारा लगभग 51किग्रा0 चॉंदी से कामधेनु की नयमाभिराम श्रीविग्रह बनाया गया था। रजत कमल पुष्प में विराजमान ठाकुरजी के श्रीविग्रह का अभिषेक स्वर्ण मण्डित रजत गौ विग्रह के पयोधरों से निकली दुग्धधारा से हुआ। ठाकुरजी के अभिशेक से पूर्व गौमाता का पूजन कर देवताओं का आव्हान किया गया।
ठाकुरजी के श्रीविग्रह का दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि सामग्रियों से दिव्य महाअभिषेक किया गया। जन्माभिषेक के उपरान्त इस महाप्रसाद का वितरण जन्मस्थान के निकास द्वार के दोनों ओर वृहद मात्रा में किया। भगवान का जन्म महाभिषेक रात्रि 12:15 बजे से रात्रि 12:30 बजे तक चला। तदोपरान्त 12.40 से 12.50 तक श्रंगार आरती के दर्शन हुए। जन्म के दर्शन रात्रि 1:30 बजे तक खुले रहे।
कार्यक्रम के दौरान महंत नृत्यगोपाल दास, गुरुशरणानंद, अनुराग डालमिया, डा. चंद्रभान गुप्ता, सचिव कपिल शर्मा, संस्थान संदस्य व हिन्दूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, डा. विनोद बनर्जी, राजीव श्रीवास्तव एवं विजय बहादुर, जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार, एसपी सुरक्षा ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह सहित सभी अधीनस्थ एवं पुलिस टीम व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुस्तैदी के साथ सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभाले रहे।













Related Items
ब्रज रज उत्सव को लेकर हुई समीक्षा बैठक
श्री किशोरी जी के प्राकट्योत्सव के उल्लास में डूबा ब्रज
ब्रज में मची है कान्हा के जन्मोत्सव की धूम