देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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वृन्दावन(जहीर आलम)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव है, योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादीकाल से जनमानस के लिये जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहें हैं। जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं वरन पूरे विश्व में बसे भारतीय इसे पूरी आस्था व हर्षांल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्य रात्रि में अत्याचारी कंश का विनाश करने के लिये मथुरा में अवतार लिया। चूंकि भगवान स्वंय इस दिन प्रथ्वी पर अवतरित हुये थे। अतः इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसिलये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ती के रंगो से सराबोर हो उठती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अपने आराध्य की मोहक छवि देखने लिये दूर-दूर से उनका आगमन मथुरा नगरी में होता है। जन्माष्टमी के उपलक्ष में बांके बिहारी मन्दिर में होती विशेष मंगला आरती तीन लोक से न्यारी मथुरा नगरी की सांस्कृतिक राजधानी वृन्दावन में अनूठी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। यहां के तीन मन्दिरों में जहां दिन में जन्माष्टमी मनाई जाती है वहीं यहां के शेष मन्दिरों में रात में जन्मोत्सव पूरे मनोयोग से मनाया जाता है। सप्त देवालयां में सुमार राधारमण मन्दिर, राधा दामोदर एवं शाहजी मन्दिर यहां तक कि विश्व विख्यात श्रीबांके बिहारी मन्दिर में ठाकुर जी का पूजन अर्चन बाल स्वरूप किया जाता है। इसके लिये मन्दिर में सेवायतों द्वारा ऐसी व्यवस्थायें की जाती हैं जिससे कि जन-जन के आराध्य लाला को किसी प्रकार की परेशानी न हो। धार्मिक नगरी वृन्दावन में जहां राधारमण मन्दिर, राधा दामोदर एवं शाहजी मन्दिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अनूठे तौर से दिन में मनाई जाती है। जबकि बाल स्वरूप में सेवा होने के बावजूद बांके बिहारी मन्दिर में जन्मोत्सव पर होने वाली मंगला आरती के दर्शन मध्य रात्रि उपरान्त होते हैं। यह मंगला आरती साल में एक ही दिन होती है, तदोपरान्त सुबह 5.30 तक दर्शन खुल रहते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उपरान्त अगले दिन बांके बिहारी मन्दिर में धूम-धाम से नन्दोत्सव मनाया जाता है। मन्दिरों की खासतौर पर होती है सजावट एवं स्त्री पुरूष 12 बजे तक रखते वृत
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मन्दिरों को खास तरह की सजावट कर सजाया जाता है। इस दौरान मन्दिरों में निम्न प्रकार की झाकियां सजाने साथ ही भगवान कृष्ण को झूला झूलाया जाता है साथ ही रासलीला का आयोजन होता है।













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