देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा(केके पाठक)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के तत्वावधान में दिव्य मनोहारी 'कमलाकृति पोशाक भगवान को विधि-विधान से अर्पित की गयी।
इस अवसर पर भगवान श्रीकेशवदेव मंदिर से पोषाक अर्पण यात्रा झॉॅंझ, मजीरे, मृदंग, ढोल, नगाड़े की मंगल ध्वनि हरिनाम संकीर्तन के मध्य निकाली गयी। श्रीयोगमाया जी मंदिर तदोपरान्त श्रीगर्भगृह के दर्शन करते हुये यात्रा भागवत भवन मंदिर में पहुॅंची। इस परम मंगलकारी अवसर पर सैकड़ों देश-विदेश से पधारे हजारों भक्तजन ने साक्षी बन अक्षुण्य पुण्य को प्राप्त किया। भगवान श्री राधाकृष्ण को यह दिव्य पोषाक एवं श्रंगार श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं संस्थान सदस्य व हिन्दूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने अर्पण किया।
तदोपरान्त चॉंदी से निर्मित कामधेनु स्वरूपा गौमाता का पूजन एवं अभिषेक किया गया। यही दिव्य गौ प्रतिमा भगवान के जन्म उपरान्त अपने पयोधरों की पवित्र दुग्ध-धारा से भगवान के चल विग्रह का अभिषेक करेंगी। इस चित्ताकर्षक गौमाता के दर्शन कर भक्तजन अभिभूत हो उठे। गौमाता के दिव्य अंगों पर अनेकानेक देवी-देवताओं के मनोहारी चित्र उत्कीर्ण हैं, ऐसी मान्यता है कि गौमाता में 33कोटि देवता का नित्य वास रहता है।
इस अवसर पर मोर्छलासन के भी दर्शन कर भक्तजन ठाकुरजी के जय-जयकार कर उठे। रजत निर्मित इस मोर्छलासन पर बड़ी ही मनोहारी पच्चीकारी की गयी है। इस वर्ष प्रथमवार ठाकुरजी के चलविग्रह प्राकट्योपरान्त मोर्छलासन पर विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे।भगवान के चलविग्रह का प्राकट्य रजत निर्मित दिव्य कमलपुष्प से होगा। भगवान के प्राकट्य के साक्षी दिव्य रजत कमलपुष्प की नक्काशी एवं पच्चीकारी चित्ताकर्षक है। श्रीकृष्ण के स्वरूप श्रीसालिग्राम भगवान खीरे से प्रकट होंगे।
इस अवसर पर संस्थान के मुख्य अधिषाशी राजीव श्रीवास्तव, ओएसडी विजय बहादुर सिंह, हेमन्त मुकुटवाला, अनिलभाई, संदीप अग्रवाल आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।













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