देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read More
मथुरा(सतपाल सिंह)। बात करते हैं वृंदावन के उन मंदिरों की जहां हम जन्माष्टमी मना सकते हैं. यहां की जन्माष्टमी बहुत लोकप्रिय भी है. इन मंदिरों को सजाया जाता है. साथ ही जन्माष्टमी पर यहां की रौनक बहुत अलग होती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है. इस बार जनमाष्टमी 3 सितंबर को है. केवल वैष्णव संप्रदाय के लिए ही नहीं बल्कि सभी हिंदुओं के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एक विशेष पर्व है।आज हम बात करेंगे मथुरा-वृंदावन के उन मंदिरों की जहां हम जन्माष्टमी मना सकते हैं. यहां की जन्माष्टमी बहुत लोकप्रिय भी है. इन मंदिरों को सजाया जाता है. साथ ही जन्माष्टमी पर यहां की रौनक बहुत अलग होती है.
बांके बिहारी मंदिर-बांके बिहारी मंदिर मथुरा के वृंदावन में स्थित है. इस मंदिर की स्थापना स्वामी हरिदास ने की थी. इस मंदिर में भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है.
पागल बाबा मंदिर-पागल बाबा का मंदिर वृंदावन में स्थित है. मान्यता के अनुसार, यहां भगवान श्री कृष्ण ने युवावस्था में थे और यहां उन्होंने राधा और गोपियों के साथ रासलीला की थी.
प्रेम मंदिर-इस मंदिर का निर्माण जगद्गुरु कृपालु जी महाराज ने किया था. यह 54 एकड़ में फैला हुआ है. इसे बनाने में 1000 आर्टिस्ट के साथ 12 साल लगे थे. इस मंदिर को जन्माष्टमी पर विशेष तौर पर सजाया जाता है.इस्कॉन मंदिर-आप कृष्ण नगरी वृंदावन गए और यहां का इस्कॉन मंदिर नहीं देखा तो कह सकते हैं कि आपकी यात्रा अधूरी रही. इस मंदिर की खूबसूरती देखते ही बनती है. यह 1975 में बना था. इस मंदिर को श्री कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि श्रीकृष्ण 5 हजार साल पहले यहां दूसरे बच्चों के साथ खेला करते थे।













Related Items
मकर संक्रांति पर राजस्थान रंग में रंगा : पतंगों से सजे मंदिर, तीर्थों पर डुबकी, जयपुर में पतंगबाजों की अग्निपरीक्षा
पूरी सृष्टि में केवल पुष्कर में है ब्रह्मा जी का मंदिर, जानिए कारण
जगन्नाथ पुरी मंदिर के चार द्वार, जिसमें छिपा है मोक्ष, विजय, समृद्धि और धर्म का रहस्य