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नई दिल्ली। केन्द्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग के बीच रोजगार गांरटी योजना मनरेगा की दिहाड़ी में संशोधन पर विचार करने का मानस बना रही है। मनरेगा की मजदूरी में संशोधन किया जाता है तो यह अगले साल लोकसभा चुनाव के आसपास किया जाने का अनुमान है। पिछली बार 2009 में जब दो बार मजदूरी बढाने को लेकर संशोधन किया गया था, इस दौरान एक समस्या सामने आई थी।
कुछ राज्यों ने उस दौरान अपनी मर्जी से न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की थी। मनरेगा के तहत बिहार और झारखंड राज्य में प्रतिदिन मजदूरी 168 रुपए से लेकर हरियाणा में 281 रुपए हैं। अभी बिहार में अप्रेल, 2018 से प्रभावी न्यूनतम मजदूरी 237 रुपए है। वहीं, झारखंड में यह 210 रुपए और हरियाणा में 281 रुपए है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी तय करेगी कि मजदूरी में कितनी बढ़ोतरी करना है। इसका वित्तीय कार्यान्वयन केंद्र के जिम्मे ही रहेगा।
सरकार ने चार साल में मनरेगा मजदूरी को तय करने के लिए दो कमीटियां गठित की थीं। सरकार ने 2018-19 में मनरेगा के लिए 55,000 करोड़ का बजट तय किया है। उल्लेख है कि यूपीए सरकार ने वर्ष 2006 में मनरेगा योजना प्रारंभ किया था। ग्रामीण विकास मंत्रालय की यह योजना राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत हरेक ग्रामीण परिवार को साल के 365 दिनों में से कम से कम 100 दिनों तक रोजगार देने का अधिकार प्रदान किया हुआ है।
साभार-khaskhabar.com













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