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मथुरा(सुनील शर्मा)। विद्युत संविदाकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाये जाने का फैसला सरकार के गले की हड्डी बन सकता है। विद्युत संविदाकर्मी सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। विद्युत संविदा मजदूर संगठन आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए दूसरे संगठनों को भी साथ लेने की रणनीति पर काम कर रहा है। संगठन सरकार के इस कदम को संविदाकर्मियों के खिलाफ एक रणनीतिक कदम की तरह देख रहा है। संगठन का मानना है कि अगर विद्युत संविदाकर्मियों को सरकार हटाने में कामयाब रही तो दूसरे विभागों में वर्षों से कार्यरत संविदाकर्मियों को भी इस तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
विद्युत संविदा मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष चकलेश्वर पाण्डेय एवं संयोजक गणेश तौमर ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधिन के बाद घोषित हुए सात दिन के राष्ट्रीय शोक को देखते हुए यह फैसला लिया गया था कि आंदोलन को 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया जाये। अब 27 अगस्त से आंदोलन को प्रभावी तरीके से शुरू किया जाएगा।
600 कर्मचारी हो जाएंगे बेरोजगार
सरकार ने एक आदेश जारी कर संविदा पर काम कर रह विद्युत कर्मचारियों को हटाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद जनपद में ही 600 संविदाकर्मी बाहर हो गये हैं। प्रदेश भर में ऐसे लोगों की संख्या लाखों में है। ऐसे कर्मचारियों की संख्या अच्छी खासी है जो 20-20 साल से विभाग में काम कर रहे हैं।
सभी विभागों में हजारों की संख्या है ऐसे कर्मचारियों की
सभी विभागों में बड़ी संख्या में संविदाकर्मी काम कर रहे हैं। विद्युत संविदाकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाये जाने के बाद ऐसे सभी कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है। विद्युतकर्मियों को आंदोलन में इनका साथ मिलने की संभावना बहुत ज्यादा है। अगर ऐसा हुआ तो यह आंदोलन सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।













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