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आठ माह के पुत्र ने दी शहीद पिता को मुखाग्नि

शहीद पुष्पेन्द्र सिंह शहीद पुष्पेन्द्र की पत्नी को चेक देते केबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण व डीम सर्वज्ञराम मिश्र
मथुरा(अनिल कुमार)। जहां पूरा देश स्वतंत्रता दिवस समारोह को मना रहा था, वही आठ माह को मासूम सिद्धार्थ अपने उस पिता की मुखाग्नि दे रहा था। जो देश सीमा की रखवाली करते हुए शहीद हो गया। यहां हर ओर एक ही आवाज गंज रही थी जाब तक सूरज चांद रहेगा पुष्पेन्द्र तेरा नाम रहेगा।
देश भर में स्वतंत्रता दिवस की 72 वीं वर्षगांठ का जश्न मन रहा था। इन्ही बीच मथुरा जनपद का एक गांव खुटिया अपने उस जांबाज की शहादत पर फक्र कर रहा था। जो देश की सीमा की रखवाली करते हुए कुर्बान हो गया था। दो दिन के इंतजार के बाद मंगलवार की देर शाम जैसे कश्मीर में एलओसी पर शहीद हुए पुष्पेन्द्र सिंह का शव गांव में पहुंचा, मौजूद जनसमुदाय के मुख से पुष्पेन्द्र के अमर रहने के नारे गूंजने लगे।
शही पुष्पेन्द्र का पार्थिव शरीर शाम करीब 8 बजे सेना के वाहन से गांव पहंुचा। पार्थिव शरीर को सबसे पहले घर ले जाया गया। यहां परिवार की महिलाओं ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद शव सौंख-गोवर्धन मार्ग स्थित स्मारक स्थल पर लाया गया। यहां सभी ने शहीद के अंतिम दर्शन किये। केबिनेट मंत्री चैधरी लक्ष्मीनारायण ने शहीद को श्रद्धाजंलि दी। जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने  भी शहीद को पुष्पचक्र अर्पित किए। शहीद की पत्नी सुधा भी स्मारक स्थल पर पहुंची। यहां उन्होनें फिर पति के अंतिम दर्शन किए। शहीद का शव लेकर आए सेना के जवानों ने शस्त्र नीचे कर सलामी दी। शहीद के पार्थिव शरीर को चिंता पर रखते ही एक बार  फिर वातावरण गगन भेदी नारों से गूंज उठा। शहीद के आठ माह के पुत्र सिद्धार्थ ने अपने ताउ बनवारी की गोद में रहते हुए पिता की चिंता की परिक्रमा की। इसके बाद अबोध बालक ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य को जिससे भी देखा उसकी अंाखे नम हो गई। 
 
 
तिरंगे में लिपट कर आउं तो रोना मत कुछ दिन पहले पत्नी से कहा था
 
पुष्पेद्र को अपनी शहादत का अहसास पहले ही हो गया था। दो माह पहले छुट्टियां के बीच में ही उसे बुला लिया गया तो  उसने यह बात अपनी पत्नी सुधा से कही थी इन्हें याद करते हुए सुधा रोते हुए बिखला पडती है।
 पति की शहदत की खबर जैसे ही सोमवार को उनकी पत्नी सुधा को मिली तो हरप्रभ हो गई। सुधा पे बिलखते हुए बताया  कि उनके पति को शहादत का अहसास पहले से हो गया था। वह मई माह में छुट्टी लेकर घर आये थे। यूनिट से अचानक बुलावा आया औरर वहा अधूरी छुट्टी काटकर 26 मई को रवाना हो गाये। जाने से पहले उन्होनें बताया कि सीमा पर कुछ गडबड़ है। फौज को मेरी जरूरत है। उन्होंने पत्नी से कहा कि मै जब तिरंगे में लिपट कर घर आउं तो तुम आंसू नही बहाना। मेरा सौभाग्य होगा कि मै देश के काम आ सका। सुधा की इन बातों को सुनकर हर किसी के रौंगटे खडे़ हो रहे थे।
 
 
 
शहीद परिवार को नौकरी, खेती की दरकार दिए 25 लाख केबिनेट मंत्री, डीएम और नेताओं के समक्ष रखी है मांगें
 
कश्मीर में एलओसी पर शहीद हुए पुष्पेन्द्र सिंह के परिवार को राज्य सरकार की ओर से 25 लाख रूपये का चेक प्रदान किया गया। इसमें 20 लाख रूपये शहीदी की पत्नी सुधा को सौंपा गया जबकि 5 लाख रूपये का चेक माता-पिता को दिया गया। परिवार ने सरकार से नौकरी औरर खेती की भी दरकार की है।
शहीद के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। पिता तेजसिंह राज मिस्त्री का काम करते है। बड़ा भाई बनवारी रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा है। बडे भाई ने प्रदेश के  केबिनेट मंत्री चैधारी लक्ष्मीनारायण ने सामने परिवार की इस स्थिति से बंया करते हुए शहीद की विधवा को नौकरी दिए जाने की मांग रखी। इस पर केबिनेट मंत्री ने आश्वस्त करते हुए जल्द मांग पूरी करने की बात कही। जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र से भूमिहीन होने की पर खेती लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग रखी।
 
 
श्रद्धाजंलि देने वालों का लगा रहा तांता
 
शहीद पुष्पेन्द्र को नमन करने पहंुचने वालों का तांता लगा रहा। शहीद को नमन करने के लिए क्षेत्रीय विधायक ठाकुर कारिन्दा सिंह, बाबा कढे़रा सिंह स्कूल के चैयरमैन सुरेश सिंह, प्रमुख प्रतिनिधि बाबूलाल, पूर्व जिला पंचायत हरीचंद, भाजपा नेता हेमराज कुन्तल, सुरेश भगत, राजकुमार चैधरी, जिला सहकारी संघ के डायरेक्टर जगदीश कुन्तल, पूर्व सभासद विजय सिंह, बलजीतसिंह, सहकारी संघ के चैयरमैन संजय चैधरी, नगर पंचायत अध्यक्ष भरतसिंह, साकेत गर्ग, प्रहलाद सिंह, ग्राम प्रधान पति तेजवीर सिंह आदि पहुंचे।
 
 
 
शहीद पुष्पेन्द्र का शव देख फू पड़ा गुबार, गूंजे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे
 
 
 एलओसी पर शहीद हुए सैनिक पुष्पेन्द्र सिंह का शव मंगलवार की देर शाम सौंख के गांव खुटिया पहुंचा तो पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगने लगे। पाकिस्तान के खिलाफ युवाओं में आक्रोश साफ दिखा। पाकिस्तान से लोहा लेने के लिय युवा सीने को पीट-पीटकर गद्दार पाकिस्तान कहते जोश में लवरेज दिखे। हर आंखे से टपकते आंसू शहीद को नमन करते दिख रहे थे। मथुरा जनपद का लाल पुष्पेन्द्र सिंह अमर रहे। हाथों में देश का तिरंगा लिए युवाओं को जोश देखते ही बन रहा था। पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश थमने का नाम नही ले रहा था। मानो कि यह युवा पाकिस्तान की नापाक हरकतों से लोहा लेने के लिए संकल्प लेते दिखे। गांव में शहीद के शव पहंुचते ही युवा और बुजुर्गो की आंखें नम हो गई।
 
 
 
मुस्लिम किसान ने मुफ्त में दी शहीद को 50 वर्ग गज जमीन
 
150 वर्ग गज जमीन पर बनेगा पुष्पेन्द्र का शहीद स्मारक
 
 
 शहीद पुष्पेन्द्र का स्मारक 150 वर्ग गज जमीन पर बनेगा। इसके लिए जमीन की खरीद की गई। इसमें नजीम खान ने स्मारक के लिए 150 वर्गगज जमीन में से 50 वर्ग गज जमीन मुफ्त देने की बात की। बाकी के लिए 3.50 लाख रूपये का सौदा हुआ। परिवार स्थिति ज्यादा कमजोर होने के कारण यह राशि भी जुटाना संभव नही था। ऐसे में 2.50 लाख रूपये पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि प्रीतमसिंह द्वारा तथा शहीद के परिवार के पदम सिंह ने 1 लाख रूपये दे का भरोसा दिया। इसके बाद शहीद का अंतिम संस्कार हुआ।
 

नारद संवाद

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