देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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गोवर्धन( पवन शर्मा)। झमाझम बारिश और बारिश में भीगते श्रद्धालु। श्रद्धालुओं की बनी मानव श्रंखला। आस्था के कुंभ में भक्ति और प्रकृति के अनूठे नजारे का संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं की आस्था बारिश पर भारी पड़ी। मुड़िया मेला में तीसरे दिन की रात्रि और चैथे दिन लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा। श्रद्धालुओं ने बारिश को इन्द्रदेव की कृपा मानते हुए परिक्रमा लगाई। गिरिराज महाराज के जयकारों से समूची तलहटी गुंजायमान रही। आस्था दर आस्था सैलाब बढ़ता ही चला गया। मन की मुराद और भक्ति की कामना को लेकर प्रभु का नाम लिये लाखों श्रद्धालु बस आगे ही बढ़े चले जा रहे थे। दिन हो या रात बस चहुंओर जनसैलाब के नजारे दिखाई दे रहे थे। श्रद्धालुओं ने इन्द्र देव की कृपा को स्वीकार करते भीगते हुए 21 किमी की परिक्रमा लगाई। श्रद्धालुओं के मन में आस्था का इस कदर जुनून सवार था कि बदन पर भीगे कपड़े भी उनको उत्साह कम नहीं कर रहे थे। मुड़िया मेला में लगातार बारिश और बारिश से फैली अव्यवस्थाएं हावी होने के बाद क्षणमात्र भी भक्तों को परेशानी नहीं हो रही थी। सैलाब का नजारा बस वहीं से शुरू और वहीं आता हुआ दिखाई दिया। परिक्रमा में श्रद्धालुओं के बढ़ते हुए कदम तो दिखाई नहीं दे रहे थे लेकिन तेज गति से सैलाब को चलता देख जरूर लगने लगा कि भक्ति की प्रबल धारा अब तेज बहने लगी है। जगह-जगह परिक्रमा में हुए जलभराव के बीच परिक्रमार्थी निकलते नजर आये। पार्किंग स्थलों पर पानी भर गया और बारिश के कारण हैलीकाॅप्टर से भी परिक्रमा नहीं हो सकी। परिक्रमा में ऊपर उड़ने वाले हेलीकाॅप्टर के नजारे को देखने की अभिलाषा अधूरी रह गई। हैलीपैड पर जलभराव नजर आया और हेलीपैड की सुरक्षा में लगे कई दर्जन सुरक्षाकर्मी व अन्य कर्मचारी बारिश का बंद होने का इंतजार करते रहे लेकिन बारिश नहीं रूकी और बारिश का कम और ज्यादा बरसने का क्रम चलता ही रहा। गिरिराज जी के प्रमुख मंदिरों में मुराद को पूरी करने के लिए दूध-भोग चढ़ाने और पूजा करने वालों की संख्या भी बढ़ती गई। मंदिरों में पूजा करने के लिए खचाखच भीड़ रही। भीड़ का सैलाब गिरिराज दानघाटी मंदिर, परिक्रमा मार्ग में आन्यौर, पूंछरी, जतीपुरा, राधाकुंड के अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और पार्किंग स्थलों पर दिखाई दिया। परिक्रमा मार्ग में अलग-अलग नजार भी कम नहीं थे। धार्मिक कार्यक्रम हो या सेवा शिविर और भजनों पर थिरकते श्रद्धालु सभी मेला की शोभा बढ़ा रहे थे। मुड़िया मेला में चहुंओर भक्ति का वातावरण दिखाई दिया।













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