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पाकिस्तान को नया प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। नए प्रधानमंत्री के रूप में पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। अब बात करते हैं इमरान के पाकिस्तान में प्रधानमंत्री बनने से भारत से रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा। इसके बारे में पता चला है कि भले ही पाकिस्तान में इमरान प्रधानमंत्री हों, लेकिन वे महज कठपुतली के रूप में काम करेंगे। एक तो चुनाव में उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, दूसरा वे पाकिस्तानी सेना के कहने में रहेंगे। मतलब यही निकलता है कि रिश्ते तल्ख रहेंगे! चुनावी रैलियों में भी इमरान ने अपने भाषणों में नरेंद्र मोदी की खिलाफत की थी। इससे भी संकेत मिलते हैं कि भारत के प्रति उनका क्या नजरिया है।
इमरान खान अपने भाषणों में नवाज शरीफ को आधुनिक मीर जाफर कहका मोदी की भाषा बोलने वाला बता चुके हैं। इमरान ने अपने पूरे चुनावी कैंपेन में काफी उग्र तरीके से कश्मीर मुद्दा उठाया है। उन्होंने कश्मीर में हिंसा के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। भारत की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में इमरान ने कहा था कि "मैं नवाज शरीफ को बताऊंगा कि मोदी को कैसे जवाब देना है।" ये तमाम बातें हैं जो इस ओर इशारा कर रही हैं कि हमारे पड़ोसी देश के नए पीएम हमारे बारे में कैसे भावना रखते हैं। उनकी इस प्रकार की अवधारणाअों से भारत को सचेत रहना होगा।
अगर भारतीय खुफिया एजेंसी की इस रिपोर्ट की मानें तो इमरान खान सेना और आईएसआई के अनुरूप ही चलते हैं। जैसा सेना और आईएसआई चाहेंगे, इमरान वैसा ही करेंगे। इन चुनाव में सेना और आईएसआई नवाज शरीफ के खिलाफ थे। क्योंकि नवाज की नीति सेना और आईएसएस के खिलाफ थी। जबकि इमरान खान सेना और आईएसआई के अनुरूप चलने वाले हैं। यह इस बात से भी साबित होता है कि पाकिस्तान चुनाव में विपक्षी दलों ने इमरान को जिताने के लिए पाकिस्तानी सेना पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पाकिस्तान में इमरान खान के बारे में कहा जाता है कि वे सेना के पोस्टर बॉय हैं। वे वही करते हैं जो सेना उनसे कहती है। इमरान खान खुद भी कह चुके हैं कि वे सेना के साथ मिलकर काम करेंगे। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि विदेशी मामलों में पाकिस्तान की नीति वही होगी, जो पाकिस्तान की सेना तय करेगी। इस चुनाव को परोक्ष रूप से सेना की जीत माना जा रहा है।
इस चुनाव में पाकिस्तानी फौज को मजिस्टेरियल पॉवर दी गई थी। इसके तहत पोलिंग स्टेशन के अंदर और बाहर फौज की तैनाती की गई। मतदान के दौरान सेना पर बहुत सारे केंद्रों से पार्टी एजेंटों को बाहर कर देने और मीडिया को भी अंदर प्रवेश नहीं करने देने के आरोप लगे थे।
साभार-khaskhabar.com













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