देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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महाराष्ट्र का नागपुर भारी बारिश के बाद पानी में डूब गया है। शुक्रवार को हुई 9 घंटे की बारिश ने नागपुर को पानी पानी कर दिया। शहर की सडक़े तालाब बन गई और घरों में पानी घुस गया। फिलहाल बारिश रुकी हुई है और पानी उतर रहा है। एयरपोर्ट से उड़ाने भी शुरू हो चुकी हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे भारी बारिश का अनुमान जताया है। बारिश की आशंका से शनिवार को भी स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे।
विकास के दावों की खुली पोल...
बारिश की वजह से विकास के दावों की पोल खुल गई हैं। नागपुर में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं लेकिन एक दिन की बारिश में पूरा शहर पानी में डूब गया। बड़ी बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर के रहने वाले हैं। इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी यहीं के हैं और आरएसएस का मुख्यालय भी यहीं पर है। विपक्ष पूछ रहा है कि जो सीएम अपना शहर नहीं संभाल पा रहा वो सूबे को क्या संभालेगा।
ये हैं पानी भरने का कारण...
आसपास बनाई जा रही सीमेंट रोड के पास ड्रेनेज सिस्टम नहीं बना है। जिसके कारण विधानभवन के ड्रेनेज सिस्टम में सीमेंट के ब्लॉक बने होने से निकासी अवरुद्ध हुई। वहीं विधानभवन के पास स्थित एक नाले पर अतिक्रमण की वजह से निकासी नहीं हो रही। ऐसा भी बताया जा रहा है कि सीमेंट रोड विधानभवन की सतह से तुलना में ऊंची है। ऐसे में पानी भवन में घुस गया।
खतरे में पड़ गई 500 बच्चों की जिंदगी...
बारिश के चलते कल नागपुर के पिपला इलाके आदर्स संस्कार स्कूल के 500 बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। 500 के करीब बच्चे स्कूल में ही फंस गए। सुबह जब बच्चे स्कूल पहुंचे तबतक तो हालात सामान्य थे लेकिन धीरे धीरे पानी इतना बढ़ गया कि स्कूल के अंदर तक पहुंच गया। स्कूल ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने बच्चों को नाव और ट्रकों के सहारे निकालना शुरू किया। अगले 48 घंटे में भी भारी बारिश की चेतावनी की वजह से स्कूलों को शनिवार को बंद रखा गया है।
विधानसभा का कामकाज ठप...
बारिश की वजह से साल 1971 के बाद पहली बार नागपुर में हो रहे विधानमंडल के मानसून सत्र पर बारिश की ऐसी मार पड़ी कि विधानसभा का कामकाज ठप हो गया जबकि विधान परिषद को चंद मिनटों में ही सोमवार 9 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया। ड्रेनेज लाइन के चोक होने से बिजली आपूर्ति करने वाले स्विचिंग रूप में पानी भर गया। बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ी और एहतियातन कामकाज को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस घटना से शहर में मानसून सत्र की तैयारी की पोल खुल गई। पावर स्टेशन में पानी भरने की वजह से बिजली की सप्लाई ठप हो गई और महाराष्ट्र के मंत्री विनोद तावड़े सहित कई विधायक मोमबत्ती जलाकर अपने कमरे में बैठे नजर आए। बताया जा रहा है कि विधानसभा के पास के नालों की सफाई ही नहीं हुई थी और इसी वजह से पानी विधानसभा में भर गया।
1961 में भी ठप हुआ था कामकाज...
वर्ष 1961 में नागपुर में हुआ मानसून सत्र ऐसे ही संकट से रूबरू हुआ था। 23 अगस्त को जिला काउंसिल बिल पर चर्चा के दौरान विधानसभा की बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। इसके चलते कामकाज को आठ मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा था। आपूर्ति बहाल होने के बाद कामकाज पुन: आरंभ हुआ। लेकिन आपूर्ति पुन: बाधित हुई। ऐसे में तत्कालीन उपाध्यक्ष ने कामकाज को पूरे दिन के लिए स्थगित कर अगली बैठक 28 अगस्त को कराने की घोषणा की।
साभार-khaskhabar.com













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