देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read More
मथुरा(सतपाल सिंह)। रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने सत्र 2018-19 से एमए अंग्रेजी की पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया है। इस कोर्स से छात्रों को अंग्रेजी साहित्य, भाषा विज्ञान एवं अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान का अनुभव होगा एवं रोजगारपरक बनने के अवसर मिलेंगे।
विभागाध्यक्ष प्रो. नितिन भटनागर ने बताया कि अंग्रेजी अब व्यापार एवं विज्ञान की विश्वभाषा हो गयी है फिर भी अपेक्षाकृत कम ही छात्र भलीभांति यह भाषा सीख पाते हैं। इसी कमी को देखते हुए एवं छात्रों तथा अभिभावकों का अंग्रेजी के प्रति लगातार बढ़ते रूझान को दृष्टिगत रखते हुए जीएलए विश्वविद्यालय ने रोजगारपरक एमए अंग्रेजी की शुरुआत की है।
उन्होंने बताया कि आगामी सत्र से चलने वाला यह कोर्स अंग्रेजी साहित्य, भाषा विज्ञान एवं अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान के प्रक्षेत्रों मशीनी अनुवाद, कंटेट डेवलपमेन्ट आदि में छात्रों को प्रशिक्षित करेगा। इस कोर्स में नामांकन हेतु सीटों की संख्या 30 निर्धारित की गयी है। कोई भी इच्छुक अभ्यर्थी जिसने किसी भी संकाय में इण्टरमीडिएट से स्नातक तक अंग्रेजी विषय में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त किये हों, वह छात्र एमए अंग्रेजी में नामांकन हेतु आवेदन कर सकता है। नामांकन ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होगा।
एमए अंग्रेजी की उपाधि प्राप्त छात्रों के लिए रोजगार के अवसरों की उपलब्धता पर प्रकाश डालते हुए आईआईटी मद्रास से अंग्रेजी विभाग के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर एवं निवर्तमान जीएलए विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर श्रीष चौधरी ने बताया कि यह पाठ्यक्रम अपने आप में एक अनूठा प्रयोग है। भारत के लोग अंग्रेजी के सफल शिक्षक माने जाते रहे हैं। एमए अंग्रेजी के उपाधिधारक न केवल देश के विद्यालयों या महाविद्यालयों में अपितु विदेशों में भी अध्यापन का कार्य कर रहे हैं। परिणामस्वरुप, विश्वभर में भारतीय मूल के प्रशिक्षणप्राप्त अंग्रेजी के अध्यापकों की मांग में अधिक वृद्धि हुई है। साथ ही अब इन्हें कम्युनिकेशन, मीडिया, कन्टेन्ट क्रियेशन एवं डेवलपमेंट, प्रकाशन, प्रबंधन, प्रशिक्षण एवं उद्योग जगत में भी काम मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि बहुत से भारतीय भाषा विज्ञानी गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ऑरेकल जैसे कारपोरेट जगत के कई नामचीन कम्पनियों में काम कर रहे हैं। इन नये क्षेत्रों में काम के लिए आवश्यक कौशल, कम्प्यूटर एवं भाषा विज्ञान की सहायता से जीएलए विश्वविद्यालय के इस कोर्स के माध्यम से दिया जायेगा। इस पाठ्यक्रम में आधे से अधिक छात्र अन्य विकासशील देशों से आयेंगे। जबकि शेष सीटें भारतीय छात्रों के लिए उपलब्ध होंगी।













Related Items
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला : मेडिकल कोर्स में OBC को 27% और EWS को 10% आरक्षण
नीट एमडीएस कोर्स की काउंसलिंग में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार
अंग्रेजी शराब के साथ तीन गिरफ्तार