देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा(सतपाल सिंह)। उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान वि.वि एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा के कृषि विज्ञान केन्द्र के तत्वाधान में बुधवार को विकास खंड बलदेव के गांव बंदी में फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर कृषक संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें किसानों ने बढचढ कर प्रतिभाग किया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बेहतर उपाय बताकर उनके लाभ एवं फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. एस.के मिश्रा ने कहा कि किसान को खरीफ में धान, रबी में गेहूं एवं जायद के फसल अवशेषों को कदापि न जलाएं, ऐसा करने से मृदा के अंदर लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु व मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं जिससे जमीन कमजोर हो जाती है। फसल अवशेषों को छोटा-छोटा काटकर खेतों में बिखेरकर जुताई करें, 20 किलोग्राम यूरिया मिलाकर खेत में पानी भर दें जिससे फसल अवशेष 20-25 दिन में सडकर खाद बन जाता तथा खेतों की मृदा में उर्वराशक्ति में बढोत्तरी होगी साथ ही जमीन में जलधारण क्षमता में बढोत्तरी होगी और कीट व रोगों के प्रकोप में भारी कमी आयेगी। वास्तव में फसल अवशेष खेतों की उर्वरा शक्ति बढाने के लिए किसी बरदान से कम नहीं हैं। फसलों के अवशेष जलाने से भूमि का तापमान बढ जाता है जिसके कारण भूमि की संरचना खराब होने लगती है। पर्यावरण प्रदूषित होता है। फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध एवं गैर कानूनी हैं। शासन द्वारा फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना भी तय किया गया है। डा. बी.एल यादव ने कहा कि फसल अवशेषों से जानवरों के लिए भूसा, चारा तैयार करें, तत्पश्चात शेष बचे अवशेषों को खेत में मिलाएं। तथा गाय व भैंस के गोबर से उपले न बनाकर उसकी खाद बनाकर खेतों में डालें जिससे मृदा की शक्ति में काफी बढोत्तरी होगी।
डा. ब्रजमोहन ने कहा कि सब्जियों वाली फसलों के अवशेषों को भी किसान इधर उधर न फेंककर खेतों में ही उनको सडाकर खाद तैयार करें। जिससे जमीन में जीवांश पदार्थो की मात्रा में बढोत्तरी होगी।
डा. रविन्द्र कुमार राजपूत ने कहा कि फसल अवशेषों को खेत के किनारे एवं खेतों में कभी आग न लगाएं, बल्कि अवशेषों को नाडेप कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट व खेत के कोने पर आवश्यकतानुसार गढढा खोदकर सडायें, और खेतों में मिलाएं। जिससे खेत की उर्वरा शक्ति के साथ-साथ मृदा का भौतिक, रासायनिक एवं जैविक संगठन सुदृढ होगा। खेत में पर्याप्त मात्रा में जीवाशं में बढोत्तरी होगी तथा उत्पादन भी बढेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता निहाल सिंह ने व संचालन डा. रविन्द्र कुमार राजपूत ने किया। इस मौके पर रीतराम, रामवीर, मुरलीधर, चंदपाल, गजेन्द्र, लाखन सिंह, रामबेटी, शशी, अनोखी, करन सिंह सहित सैकडों किसानों एवं महिला किसानों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान किसानों को सब्जियों की बीज भी निःशुल्क वितरित किए गए।













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