देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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संस्कार जागृति मिशन की संस्थापिका ने बताई योग की महिमा
मथुरा(पवन शर्मा) । संयम पूर्वक साधना करते हुए स्व चेतना को परम चेतना में लय कर देना ही योग है। चित्त की वृत्तियों को योग से रोकने पर व्यक्ति को स्वंय के अस्तित्व का ज्ञान होता है। तब स्वास्थ्य, सदाचार और अघ्यात्म की प्राप्ति होती है। उक्त बातें संस्कार जागृति मिशन की संस्थापिका एवं अध्यक्ष डा.अर्चना प्रिय आर्य ने योग के महत्व को बताते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोग गलत खानपान और रहन सहन की वजह से अनेकों बीमारियों से ग्रस्त हैं। आज कोई भी घर ऐसा नहीं है जिसमें कोई व्यक्ति बीमार ना हो। कहा जाता है कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। जब हमारा तन ही स्वस्थ नहीं होगा तो हम खुश कैसे रह पाएंगे। उन्होंने कहा कि बीमार होकर जीवन व्यतीत करना अपराध है। योग व्यक्ति को बीमारियों से तो दूर रखता ही है साथ में सोच को भी सकारात्मक बनाता है। उन्होंने कहा कि यम नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याआहार, धारणा, घ्यान, तथा समाधि योग के आठ अंग हैं। जबकि आम जन केवल योग के प्रथम चरण आसन को ही योग मान लेते हैं। उन्होंने कहा कि योग के अंतर्गत आसन से वाह्य शरीर तथा प्राणायाम से आन्तरिक स्थिति मजबूत होती है। स्वस्थ तन व मन होने पर योग की दूसरी सीढ़ी यम व नियम के द्वारा आत्मिक विकास होता है। अन्ततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बनता है।













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