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कीथम झील पर कांटा फंसे टेरापिन प्रजाति के कछुआ को बचाया एसओएस ने

घायल कछुआ का इलाज करते चिकित्सक।तीन सेमी लम्बा कांटा गर्दन में फंसा था, सर्जरी के बाद कांटा बाहर निकाला गया

बिलुप्त प्राय प्रजाति का है कछुआ, तस्कर कर रहे कांटे डालकर कछुओं की तस्करी

मथुरा। फरह कस्बे में वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम ने आगरा स्थित कीथम झील पर यमुना किनारे टेरापिन प्रजाति के काले धब्बों वाले कछुआ को गंभीर स्थिति से बचाया है। सर्जरी के बाद कछुआ के शरीर में फंसे कांटे को निकाला गया है।

वाइल्ड लाइफ  टीम को सूचना मिली कि यमुना किनारे काले धब्बे युक्त कछुआ मरणासन्न स्थिति में है। दो सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची और ब्लैक टेरापिन को देखा। टीम ने तुरन्त कछुआ को केन्द्र स्थित वेटरिनरी अस्पताल में दाखिल कराया, जहां डा. एस इलारिया ने सर्जरी के बाद उसके गले में फंसे लोहे के कांटे को बाहर निकाला। अभी कछुआ चिकित्सीय परीक्षण में हैं। डा. इलारिया ने बताया कि तीन सेमी लम्बा लोहे का तीखा कांटा उसके गर्दन वाले भाग में गहराई तक फंसा था। इससे उसकी सांस नलिका बस्र्ट हो गई थी। यदि हम लोग और थोडी देर कर दें तो उसकी मौत हो सकती थी। वाइल्ड लाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक नारायण कहते हैं कि कीथम के आसपास संभवत कछुओं की तस्करी की जा रही है। मछली पकडने के कांटे से विलुप्त प्रजाति के कछुओं को भी शिकार बनाया जा रहा है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

 

जनवरी में भी एक कुछआ को बचाया गया था

जनवरी में भी टीम ने ऐसी हालत में एक कछुआ को बचाया था। उसके भी कांटा फंसा था। यदि प्रशासन की ढील रही तो पानी की गंदगी दूर करने में सहायक कछुओं की तस्करी बेलगाम होती रहेगी और इससे संतुलन भी डगमगा जाएगा।

 

 

नारद संवाद

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