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ब्रज कला केन्द्र ने सूर जयंती मनाई

ब्रज कला केन्द्र ने सूर जयंती मनाईमथुरा। पुष्टि सम्प्रदाय के वरिष्ठ महाकवि महात्मा सूरदास की 540 वीं जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर दिनांक 19 अप्रैल गुरुवार को मसानी तिराहे पर अवस्थित बृजधाम प्रेक्षागृह की सभास्थली पर ब्रज कला केन्द्र मथुरा के तत्वावधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया ष्सूर कोै ब्रज तब और अबष्। जिसमें ब्रज के शताधिक साहित्य मर्मज्ञों ने सोत्साह भाग लिया। गोष्ठि की अध्यक्षता प्रमुख उद्योगपति मनोहर लाल गोयल ने की।

सर्व प्रथम माँ सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया गया जहां शालिनी शर्मा ने ष्चरण कमल बंदौ हरी राईष् सूर का ये पद अत्यन्त विनीत भाव से प्रस्तुत किया। तदन्तर गोष्ठी के संयोजक डॉ सत्यदेव आजाद ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि महाकवि सूर युगांतरकारी कवि थे। जिन्होंने अपनी यशःकाया से अंधत्व को भी पराजित को दिया था।तथा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को श्रीकृष्ण के दर्शन की क्षमता प्रदान की। केन्द्र के महामंत्री श्री राजेंद्र प्रसाद बंसल(भगत जी) ने विशिष्ट अतिथि की हैसियत से पधारे आकाशवाणी के निदेशक श्री अरविन्द त्रिपाठी का पटका    उढाकर स्वागत किया।श्री चन्द्रशेखर शर्मा ने ब्रज कला केन्द्र का संक्षिप्त इतिहास प्रस्तुत किया। तदन्तर उर्दू, हिन्दी और अंग्रेजी साहित्य के धनी डॉ. जाहिर हसन ने अत्यंत भाव विभोर होकर अपने ख्यालों का इजहार किया। संस्कृत के आचार्य डॉ. नटवरनागर ने दृढ़ता से कहा कि ब्रजभाषा के अस्तित्व से ही हिन्दी जीवन्त रह सकती है।इस अवसर पर डॉ. ताराचंद शर्मा, डॉ. पल्लवी शर्मा, सीमा शर्मा, डॉ. सरोज अग्रवाल, अनिल वोहरे आदि अनेक विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किये। श्री अशोक अज्ञ ने सुमधुर काव्य पाठ किया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने अनेक रोचक प्रसंग सुनाए। अंत में वरिष्ठ पदाधिकारी नरेन्द्र खण्डेलवाल ने सभी आगंतुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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