देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreजगह-जगह पुलिसबल रहा तैनात
क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष ने जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
साप्ताहिक बंद के चलते सायं खुली इक्का-दुक्की दुकानें
मथुरा। आरक्षण के विरोध में भारत बंद का मंगलवार जिले में व्यापक असर देखने को मिला। सर्वण राजपूत संगठन ने होलीगेट एवं कृष्णानगर चैराहे पर प्रदर्शन किया। बाजारों में शांतिमय बंदी रही इसके बावजूद बंद को लेकर पुलिस प्रशासन खासा अलर्ट रहा। हालांकि शहर साप्ताहिक बंदी मंगलवार होने के चलते माहौल बंदी समर्थकों के पक्ष में रहा। पूर्वान्ह करीब 11.30 बजे सर्वण राजपूत संगठन के पदाधिकारियों ने होलीगेट पर प्रदर्शन किया और यहां पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
दलित आंदोलनकारियों ने दो अप्रैल को भारत बंद किया था। इसके बाद फिर से अन्य समाज के लोगों ने मंगलवार को भारत बंद का ऐलान किया। हालांकि विभिन्न समाज व संगठन के लोगों में एकरूपता नहीं था। कुछ संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था, वहीं कुछ संगठनों ने बंदी का फैसला वापस ले लिया था। इन सबका असर मंगलवार सुबह से दिखना शुरू हो गया था। सुबह अममून कई बाजार 10 बजे खुल जाते हैं, मगर यहां 11 बजे तक कई जगहों पर दुकानें नहीं खुली थी। कुछ जगहों पर इक्का दुक्का दुकानें खुल गईं थी। मंगलवार को बंद का मिला-जुला असर नजर आया। मंगलवार को विभिन्न संगठनों के द्वारा जातिगत आरक्षण के विरोध में भारत बंद का आह्वान किया गया था। इसे लेकर पुलिस प्रशासन ने भी बड़ी संख्या में पुलिस बल पहले से ही सड़क पर तैनात कर दिया था। दोपहर तक एक बजे तक बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा इसके बाद कुछ हिस्सों में इक्का-दुक्का दुकानें खुलीं दिखीं। एहतियातन पुलिस तैनात रही। वहीं बरसाना और रिफाइनरी क्षेत्र के बरारी में बंदी का ज्यादा असर दिखा। नंदगांव, राया, नौहझील में बाजार बंदी का असर नहीं दिखा तो गोवर्धन में बाजार बंदी का मिला-जुला असर रहा। महोली रोड पर कुछ लोगों ने बाजार बंदी के समर्थन में अर्ध नग्न प्रदर्शन किया। वहीं क्षत्रिय महासभा ने भी बाजारों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। पुलिस ने गोवर्धन होटल में ब्राह्मण महासंघ के पदाधिकारियों को नजरबंद कर दिया। घरों से लोगों की भीड़ निकली, मगर काफी कम संख्या रही। लोग एक-दूसरे से भारत बंद को लेकर पूछते रहे। बाजारों में भी हाल दिखे। कुछ जगह दुकानें खुली थी तो कई जगहों पर बंद मिलीं। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंडों पर भी अन्य दिनों की अपेक्षा कम लोग दिखे। सुबह के वक्त लोग सिर्फ आशंकित थे कि कहीं कोई घटना या वारदान न हो। माना जा रहा है कि इसी आशंका के चलते सड़कों व अन्य जगहों पर भीड़ कम थी। कुल मिलाकर सुबह के वक्त बंद का मिला जुला असर देखा गया। वहीं देहात क्षेत्रों में भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति नजर आई। उधर, इसे लेकर पहले से जिला प्रशासन अलर्ट था। हर थाने में पुलिस के अलावा जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
सवर्ण जाति सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के द्वारा की गई अपील पर ही जनपद में अधिकांश दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों को बंद रख आंदोलन को मौन स्वीकृति दी। जनपद में बंद के सफल रहने पर सवर्ण व राजपूतों सहिते आरक्षण का विरोध करने वालों के चेहरों पर खुशी की लहर थी। बंद के दैरान एसएसपी प्रभाकर चैधरी स्वयं दल-बल सहित भ्रमण पर रहे। इस कदर पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के पीछे बीते दो मार्च को हुए आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव तोड़फोड़ की घटना से लिया गया सबक था लेकिन इसके वितरित यह आंदोलन व्यापकता लेने के उपरांत भी शांतिपूर्ण रहा।













Related Items
भारत के पवित्र तीर्थ स्थलों की रूह: कंक्रीट और कारोबारी बाजार को भेंट
भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा सप्ताह, निवेशकों ने मल्टी-एसेट रणनीति की ओर किया रुख
अमेरिका को पछाड़कर भारत बना दूसरा सबसे बड़ा 5जी मोबाइल बाजार, एप्पल सबसे आगे