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प्रदेश के राजमार्गों पर होनी मेडीकल सुविधा की मांग
यमुना एक्सप्रेस वे पर पिछले 5 वर्षों में हुए हादसों में लगभग 705 लोगों की हो चुकी है
मौत
एक्सप्रेस वे पर वाहनों की रफ्तार का मानक 100 किमी प्रति घंटा
लेकिन गाड़ियां 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से रही है दौड़
वृन्दावन। सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल ने एक्सप्रेस वे पर हुए हादसे में एम्स के तीन डाक्टरों की मौत को लेकर सूबे के मुख्यसचिव को पत्र लिखकर एक्सप्रेसवे पर चिकित्सा सुविधा व वाहनों की स्पीड को नियंत्रित करने की मांग की है। साथ ही कुछ सवाल खडे़ किए हैं।
प्रदेश के राजमार्गों पर मेडीकल सुविधा जरूरी होनी चाहिए ताकि घायलों को तत्काल उपचार मिल सकें, एक्सप्रेस वे पर मेडीकल सुविधा क्यों नहीं हैं जबकि यमुना एक्सप्रेस वे पर पिछले 5 वर्षों में हुए हादसों में लगभग 705 लोगों की मौत हो चुकी है और दो हजार पैंसठ (2065) लोग अब तक घायल हो चुके हैं।
प्रदेश में राजमार्गों एवं एक्सप्रेस हाईवे पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को कम से कम जीवनरोधी यंत्रों का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी होना चाहिए। यमुना एक्सप्रेस वे पर वाहनों की रफ्तार का मानक 100 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए, लेकिन गाड़ियां 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही है, शासन और प्रशासन के लोग इन घटनाओं के बावजूद भी कतई गम्भीर है, तभी तो दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
महंत ने पत्र में आगे लिखा है कि मथुरा जनपद में स्वास्थ्य सेवाएं करोड़ों रूपयों के प्रतिमाह व्यय होने के बाद भी अत्यन्त ही लचर स्थिति में है, एम्स के तीन मृत डाक्टरों के पोस्टमार्टम में की गई लापरवाही इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जब मृत डाक्टरों के शव एम्स दिल्ली पहुंचे तो वहां देखा गया कि मथुरा में मृत डाक्टरों के पोस्टमार्टम लापरवाही तरीके से किए गए हैं, शवों की स्थिति बेहद बेतरतीब थी, फिर एम्स द्वारा मृत तीनों डाक्टरों के शवों को रीकन्स्ट्रक्ट (शरीर के हिस्सों को ठीक करना) किया गया।
इसकी पुष्टि एम्स के रेजीडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन के सचिव डा. राजीव रंजन के कथन से प्रतीत हुई, जिन्होंने बताया कि दरअसल वह यह नहीं चाहते थे कि परिजन अपने बच्चों की ऐसी हालत देंखे।
महंत ने पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों के खिलाफ कार्यवाही व मथुरा जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाने एवं पटरी पर लाने के लिए संवेदनशील बनाने के लिए उचित कार्यवाही की मांग एवं प्रदेश के राजमार्गों पर मेडीकल सुविधाएं मुहैया कराने को मुख्यसचिव को पत्र लिखकर की है।













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