BREAKING NEWS

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

इस शुभ मुहूर्त में करें होलिका दहन, जानिए पूजन विधि और सामग्री

इस शुभ मुहूर्त में करें होलिका दहन, जानिए पूजन विधि और सामग्रीफाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों की मानें तो पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन किया जाता है। इसके अगले दिन रंगों से खेलने की परंपरा है जिसे रंगवाली होली, धुलेंडी, धुलंडी और धूलि आदि नामों से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि इस बार एक मार्च को सुबह 8 बजे से पूर्णिमा तिथि लग रही है। लेकिन पूर्णिमा के साथ भ्रद्रा भी लग रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद होलिका दहन किया जाएगा। इसके अलावा होलिका दहन के लिए पूजा भी दोपहर में 12.08 से 12.54 तक की जा सकती है। राहुकाल दोपहर 1.56 मिनट से 3.24 मिनट दिन तक रहेगा।

 

होलिका दहन का शुभ-

एक मार्च को सुबह 8 बजकर 58 मिनट से पूर्णिमा तिथि लग रही है लेकिन इसके साथ भद्रा भी लगा होगा। ऐसा नियम है कि भद्रा काल में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। शाम में 7 बजकर 40 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगा। इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा।

होलिका दहन के लिए तीन चीजों का एक साथ होना बहुत ही शुभ होता है। पूर्णिमा तिथि हो, प्रदोष काल हो और भद्रा ना लगा हो। इस साल होलिका दहन पर ये तीनों संयोग बन रहे हैं इसलिए होली आनंददायक रहेगी। इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 26 मिनट से लेकर 8 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।क्या है भद्रा काल-

भद्रा काल का वास भद्रा काल तीन जगह वास करता है। आकाश, पाताल और मृत्यु लोक। अगर भद्रा आकाश और पाताल में वास कर रहा है, फिर तो इसका ज्यादा खतरा नहीं होता। पर अगर यह मृत्यु लोक में वास कर रहा है तो गलती से भी इसमें मंगल कार्य न करें।

 

होलिका दहन की विधि-

होलिका दहन वाले स्थान को अच्छे से साफ करें। फिर वहां गंगा जल झिडक़ कर उसे शुद्ध करें। सूखी लकडियों का ढेर बनाएं। अग्नि समर्पित करने से पूर्व होलिका का विधिवत पूजन करें। पूजन करते वक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना चाहिए। ये पूजन किसी पण्डित से करवाया जाना चाहिए।पूजन सामग्री 

होलिका पूजन सामग्री में गोबर से निर्मित होलिका और प्रहलाद के लक्षण की तरह प्रयोग में आने वाला स्वरूप, फूलों की माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, पांच या सात प्रकार के अनाज, नई गेहूं और अन्य फसलों की बालियां और साथ में एक लोटा जल रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त बड़ी-फूलौरी, मीठे पकवान, मिठाईयां, फल आदि भी अर्पित किए जा सकते हैं। होलिका के चारों ओर सात परिक्रमा करें।

साभार-khaskhabar.com 

 

 

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको  ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

Read More