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नई दिल्ली। 120 साल से चले आ रहे कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया है। शीर्ष कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नदी के पानी पर किसी भी राज्य का मालिकाना हक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद ट्राइब्यूनल (सीडब्ल्यूडीटी) के फैसले के मुताबिक तमिलनाडु को मिलने वाले पानी में कटौती की है तो बेंगलुरु की जरूरतों का ध्यान रखते हुए कर्नाटक को मिलने वाले पानी की मात्रा में इजाफा किया है।
सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि तमिलनाडु को 177.25 टीएमसी पानी दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि फैसले को लागू कराना केंद्र सरकार का काम है। आपको बता दें कि इस मामले को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु में तनाव का माहौल है।
तमिलनाडु ने कावेरी बेसिन से तमिलनाडु को 10 टीएमसी ग्राउंड वाटर अतिरिक्त इस्तेमाल की इजाजत भी दी। इससे पहले कर्नाटक ने तमिलनाडु को ये कहते हुए कावेरी का पानी देने से इंकार कर दिया था कि उनके अपने किसानों के लिए ही पानी पर्याप्त नहीं है। तमिलनाडु को इस फैसले से झटका लगा है। राज्य सरकार ने कहा है कि इस फैसले के अध्ययन के बाद वे आगे की कार्रवाई तय करेंगे। 137 साल पुराने कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक-तमिलनाडु और केरल आमने-सामने हैं।
वहीं एआईएडीएमके ने इस फैसले पर नाखुशी जताई है। पार्टी इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है। इस फैसले के मद्देनजर कर्नाटक तमिलनाडु बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। फैसले के बाद कर्नाटक से तमिलनाडु आने वाली बसों को बॉर्डर के बाहर ही रोक दिया गया।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ की पीठ ने पिछले वर्ष 20 सितंबर को कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की तरफ से दायर अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। तीनों राज्यों ने कावेरी जल विवाद अधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) की तरफ से 2007 में जल बंटवारे पर दिए गए फैसले को चुनौती दी थी।
साभार-khaskhabar.com













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