देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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समविद गुरूकुलम् सीनियर सेकेन्ड्री स्कूल द्वारा शिक्षा संस्कार संस्कृति पर आधारित ”मंथन“ कार्यक्रम में दीदी माॅं साध्वी ने ऋतम्भरा ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारम्भ किया। इस अवसर पर लोकसभा टी.वी. के सम्पादक श्याम किशोर दिल्ली से एवं रविकान्त गुड़गाॅंव से विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थिरत रहे।
इस अवसर पर साध्वी ऋतम्भरा ने ”समविद किन्डर वल्र्ड स्कूल“ के पट का लोकार्पण करते हुए दीदी माॅं साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि आज की शिक्षा पद्धति कहाॅं से कहाॅं जा रही है कुछ समझ में नहीं आ रहा है। हमें बच्चों को मनुष्य बनने की षिक्षा देनी चाहिए किन्तु हम उन्हें बना नहीं पा रहे हैं क्यों जो पत्थर छैनी हथौडों की चोट को सह जाता है वही शंकर बन पाता और जो टूटकर छिटक जाता है वह कंकड़ बन जाता है। सम्मान और श्रद्धा कभी छीन कर प्राप्त नहीं होते उन्हें अपने पौरूष से अर्जित किया जाता है इसके लिए त्याग और समर्पण की आवश्यकता होती है। जब बच्चे गुरूकुलों के आचार्य के सानिध्य में शिक्षा ग्रहण करते थे तो उनकी शिक्षा में दया करूणा क्षमा सभी कुछ होता था क्यों जिस शिक्षा में साहस,शील,संवेदना,त्याग,करूणा, दया नहीं है वह शिक्षा वह ज्ञान वेकार का होता है। और शिक्षा परिवार से आती है माॅं का ज्ञान जितना होता उसकी सन्तान भी उसी प्रकार का ज्ञान प्राप्त करेगी संस्कारों का जन्म माॅं की गोदी से होता है। और शिक्षा गुरू की शरण में रहकर प्राप्त की जाती है। सन्तान को महान बनाना है तो माता पिता को अपने विचारों महान बनाना होगा। अपने परिवार को परमात्मा का आॅंगन बनाओं तो सारी समस्यायों का समाधान अपने आप हो जायेगा।
विषिष्ठ अतिथि रविकान्त ने कहा कि आज के युग में माता पिता अपने बच्चों चलता फिरता रोवोट बनाना चाहते हैं। उन्हें संस्कारों से कोई लेना देना नहीं इसी कारण बच्चे अपने उत्तर दायित्व भूलते जा रहे हैं। और अपने अध्यापकों के खिलाफ ही खड़े होने लगे हैं।
विशिष्ठ अतिथि श्याम कुमार ने कहा कि अपने यदि अपने बच्चों को संस्कारित बनाना है तो उनके अन्दर आत्मविष्वास
पैदा करना है तो उनकी और उनके कार्य की सराहना करनी चाहिए उन्हें हतोत्साहित नहीं करना चाहिए।
विद्यालय के निदेषक षिषुपाल सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेख रही तथा उसकी आवष्यकता पर प्रकाष डाला ।
इस अवसर पर संजय भैया, सुमन लता, प्रीति मेहरा, स्वामी सत्यषील,साध्वी सुहृदया गिरि, कैप्टन हरिहर षर्मा, आदि उपस्थित रहे वात्सल्य ग्राम के निदेषक विभोर प्रकाषम ने आभार व्यक्त किया तथा संचालन डाॅ0 उमाषंकर राही ने किया













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