देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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हजारों श्रद्धालुओं ने दी आहुति, भण्डारे में किया प्रसाद ग्रहण
मथुरा। जो अपने से प्यार नहीं करते वह किसी से भी प्यार नहीं कर सकते हैं। जीवन का एक-एक पल बहुत ही महत्वपूर्ण है। ज्ञानी लोग कहते हैं कि जीवन को धर्म में लगा देना चाहिए। प्रत्येक मुनष्य को रोजाना कम से कम बीस मिनट अपने लिए अवश्य निकालनी चाहिए। अपने आप को सह्दय रखने की कोशिश करनी चाहिए। उक्त उक्त विचार वेद मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश महाराज ने मसानी चैक स्थित गुरू विरजानंद आर्ष गुरूकुल वेद मंदिर में चल रहे चतुर्वेद परायण यज्ञ के समापन समारोह में कही। आचार्य श्री ने कहा कि पाप कर्मों से बचने का सबसे सरल तरीका एक ही कि वह सच्चे अर्थों में आस्तिक बने और ईश्वर को कण-कण में विराजमान समझे। उन्होंने कहा कि आत्मबल से सम्पन्न व्यक्ति को कभी दुःख नहीं हुआ करता है। आत्मबल हम सबका केन्द्र है। कार्यक्रम में समाजसेवी कृष्णवीर शर्मा द्वारा आर्य भजनोपदेशक व ब्रम्हचारियों को सम्मानित किया गया। अंत में श्रद्धालुओं ने भण्डारे में प्रसाद ग्रहण किया।













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