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प्रसून शर्मा को फिक्की का ई-कैफे पुरस्कार

प्रसून शर्मा को फिक्की का ई-कैफे पुरस्कारपुणे। एंटरप्रिन्योर कैफे के तीसरे सालाना वैश्विक सम्मेलन में इंडिया ग्लोबल सेंटर फॉर चाइना स्टडीज (आईजीसीसीएस) के संस्थापक प्रसून शर्मा को भारत-चीन सहोयग में शानदार और बेहतरीन योगदान के लिए फिक्की का ई-कैफे पुरस्कार प्रदान किया गया। 

 

प्रसून शर्मा ने भारत के लिए दो सालों में करीब 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाया है। पुणे के लोनी की एमआईटी एडीवी यूनिवर्सिटी में यह पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया।

 

आंध्र प्रदेश में भारत-चीन के संयुक्त इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए इंडिया ग्लोबल सेंटर फॉर चाइना स्टडीज (आईजीसीसीएस) के संस्थापक प्रसून शर्मा को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्होंने विज्ञान और तकनीकी राज्य मंत्रालय समेत विभिन्न भागीदारों को दोनों देशों, भारत और चीन के बीच सहयोग के लिए सफलतापूर्वक आश्वस्त किया।

 

इस अवसर पर प्रसून शर्मा ने कहा, ‘‘हम आने वाले दिनों में भारत चीन का इनोवेशन सेंटर खोलने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद भारत-कोरिया का इनोवेशन सेंटर खोला जाएगा। एमआईटी की मदद से हम निश्चित रूप से इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।’’

 

प्रसून ने कहा, ‘‘कुछ महीने पहले चीन में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बेंगलुरु और शेनजेन को जोडक़र एशिया की सिलिकॉन वैली की स्थापना के हमारे विचार को प्रमुखता से उभारा गया। इसी के साथ भारत के डिजिटल इंडिया और चीन के इंटरनेट प्लस के एक दूसरे के सहयोग से कार्य करने की संभावना पर भी ब्रिक्स सम्मेलन में खासा ध्यान केंद्रित किया गया। भारत का डिजिटल इंडिया और चीन का इंटरनेट प्लस कार्यक्रम दोनों देशों की राष्ट्रीय डिजिटलीकरण नीति के तहत विकसित किया गया है। एशियन सिलिकॉन वैली की स्थापना के विचार को क्रियान्वित करने की दिशा में कदम उठाना भी पुरस्कार मिलने के प्रमुख कारणों में से एक था।’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, स्वास्थ्य संबंधी स्टार्ट अप और ई-गवर्नेंस डोमेन के लिए 2 सालों में करीब 50 करोड़ डॉलर का निवेश लाए हैं। हमने यह सफलता विभिन्न भारतीय केंद्रीय मंत्रालयों, जिसमें विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय, शहरी विकास, श्रम और रोजगार और ऊर्जा मंत्रालय के करीबी सहयोग से काम करते हुए अर्जित की है। इसके अलावा हमने इस निवेश जुटाने के लिए कई राज्य सरकारों, जिसमें कर्नाटक सरकार, हरियाणा सरकार, गुजरात सरकार, आंध्रप्रदेश सरकार के अलावा चीन के विभिन्न प्रांतों की सरकार, जिसमें शेनजेन, क्वेनहाई और गुआंगडोंग सरकार शामिल हैं, के साथ भी मिलकर काम किया है।’’

साभार-khaskhabar.com 

 

 

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