देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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राधामोहन जी गोशाला में चारे की कोई व्यवस्था नहीं
मुआवजे के रूप में मिली धनराशि का बंदरबांट
मथुरा। चैमुहां कस्बे में हाईवे स्थित राधामोहन गोशाला में चारे के अभाव में गायें तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही हैं। इनकी ओर देखने वाला कोई नहीं है। प्रतिदिन भूख से दो-चार गाय भगवान को प्यारी हो रही हैं। इस ओर न कोई सामाजिक संगठन ध्यान दे रहा है और न ही कोई धार्मिक संस्था। कस्बे में 10 वर्ष पूर्व हाईवे किनारे राधामोहन मंदिर की जमीन पर मंदिर संचालकों ने गोशाला खोली थी। इसमें उस दौरान 150 से अधिक गायें रहीं। गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से गायों के लिए चारे की भी व्यवस्था की। वर्तमान में गोशाला की ओर कोई देखने वाला नहीं है। इससे चारे का संकट पैदा हो गया है। चारे के अभाव में गायें भूख से तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही हैं। श्रीराधामोहन मंदिर के महंत बल्लभदास महाराज ने बताया कि कुछ समय पहले गांव के लोगों ने अपनी समिति बना रखी थी, जो गोशाला की देख-रेख करती थी। कुछ असामाजिक तत्वों ने झगड़ा आदि कर समिति को भंग करा दिया। तब से यहां गायों के लिए चारे की समस्या पैदा हो गई है। उन्होंने बताया कि हाईवे चैड़ीकरण के दौरान गोशाला की भूमि हाईवे में गई थी, जिसका 53 लाख रुपए मुआवजे के रूप में मिले थे। जब तक धनराशि रही, गायों की सेवा होती रही, लेकिन अब उनके हाथ में कुछ नहीं है। वर्तमान गौशाला संचालक भारतपाल का कहना था कि शीघ्र नई समिति का गठन किया जाएगा। फिलहाल गायों के लिए चारे की व्यवस्था की जा रही है।
मुआवजे के रूप में मिले 53 लाख का हो गया बंदरबांट
मथुरा। हाईवे सिक्स लेन चैड़ीकरण में गौशाला की जमीन गई थी, जिसका 53 लाख रुपए मुआवजा मिला था। आखिर यह धनराशि कहां गई। मंदिर महंत जहां चारे में इस धनराशि के खर्च होने की बात कह रहे हैं, वहीं कस्बावासियों का आरोप है कि मुआवजे की धनराशि का बंदरबांट हुआ है।













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