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हिसार कोर्ट ने दो मामलों में रामपाल को किया बरी लेकिन अभी भी रहेंगे जेल में

हिसार कोर्ट ने दो मामलों में रामपाल को किया बरी लेकिन अभी भी रहेंगे जेल मेंहिसार। सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को हिसार कोर्ट ने दो केसों में बरी कर दिया है। हांलांकि बाबा रामपाल इन दोनों मामलों में बरी होने के बाद भी जेल में ही रहेंगे। रामपाल के खिलाफ राष्ट्रद्रोह और हत्या के मामले चलते रहेंगे। ज्ञातव्य है कि रामपाल लगभग तीन साल से जेल में बंद थे। जिन दो केसों में हिसार कोर्ट ने रामपाल को बरी किया है वेे केस 426 और 427 को लेकर जुडे हैं। इन दोनों मामलों में रामपाल सहित 11 लोग आरोपी थे। ज्ञातव्य है कि रामपाल के खिलाफ देशद्रोह सहित आधा दर्जन केस दर्ज हैं और वह हिसार की सेंट्रल जेल में बंद हैं।

 

बरी होने के बाद भी जेल में रहेंगे रामपाल: 

ज्ञातव्य है कि पिछले बुधवार को 426 औ 427 के मामलों में रामपाल की कोर्ट में पेशी हुई थी। तब कोर्ट ने दोनों मामलों में सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए हिसार कोर्ट की कार्यवाही हुई। जज मुकेश कुमार ने दोनों केसों में रामपाल को बरी कर दिया। हांलांकि रामपाल देशद्रोह और हत्या का केस चलते रहेंगे। इसलिए बरी होने के बाद भी वे जेल में ही रहेंगे। वहीं रामपाल पर फैसले को देखते हुए हिसार में धारा 144 लगाई गई थी। 

 

क्या है मामला:

ज्ञातव्य है कि सतलोक आश्रम संचालक रामपाल पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और आश्रम में जबरन लोगों को बंधक बनाने का केस दर्ज है। इन दोनों मामलों में रामपाल के साथ प्रीतम सिंह, राजेंद्र, रामफल, विरेंद्र, पुरुषोत्तम, बलजीत, राजकपूर ढाका, राजकपूर और राजेंद्र को आरोपी बनाया गया है। 

रामपाल पर हत्या का केस भी:

ज्ञातव्य है कि रामपाल कबीर पंथ विचारधारा वाले हैं। रामपाल स्वामी रामदेवानंद महाराज के शिष्य हैं। रामपाल को तीन वर्ष पहले बरवाला में हुए विवाद के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं रामपाल पर वर्र्ष 2006 में भी हत्या का केस दर्ज हुआ था। 

 

कौन हैं रामपाल दास:स्वघोषित संत रामपाल दास का जन्म हरियाणा के सोनीपत के गोहाना तहसील के धनाना गांव में हुआ था। रामपाल पहले सरकारी नौकरी में थे। रामपाल हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। नौकरी के दौरान ही उनकी मुलाकात स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई। 

 

रामदेवानंद महाराज से प्रभावित होकर रामपाल उनके शिष्य बन गए। 18 साल नौकरी करने के बाद 21 मई 1995 को रामपाल ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सत्संग करने लगे। धीरे धीरे रामपाल के अनुयायियों की संख्या बढती गई और एक महिला ने करोंथा गांव में रामपाल दास महाराज को आश्रम के लिए जमीन दे दी। इस पर रामपाल ने 1999 में ट्रस्ट की मदद से सतलोक आश्रम की नींव रखी। 

 

साभार-khaskhabar.com 

 

 

 

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