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नई दिल्ली। चीन से गहराए तनाव के बीच सरकार ने सीमाओं पर सडक़ें बनाने के काम में तेजी लाने का फैसला किया है। रक्षा मंत्रालय ने रविवार को सीमावर्ती इलाकों में सडक़ निर्माण परियोजनाओं में देरी से बचने के लिए सीमा सडक़ संगठन (बीआरओ) को वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार दिए जाने की घोषणा की। रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि यह अधिकार मुख्य इंजीनियर व टास्क फोर्स कमांडर स्तर के अधिकारियों को दी गई हैं, जिससे कि सशस्त्र बलों की जरूरत के मुताबिक परिणाम हासिल करने में कार्य के निष्पादन की गति में सुधार हो। इसमें कहा गया, यह फैसला मुख्य इंजीनियर व मुख्यालय डीजीबीआर (सीमा सडक़ महानिदेशक) व मंत्रालय के बीच संदर्भो के कारण देरी से बचने के मकसद से लिया गया है।
मंत्रालय सशस्त्र बलों से राय मशविरा कर बीआरओ को सौंपी जाने वाली सडक़ों की पहचान करेगा। बीआरओ रक्षा मंत्रालय के तहत आता है। इससे मुश्किल व दुर्गम इलाकों में सडक़ संपर्क स्थापित किया जा सके व सीमावर्ती इलाकों में वार्षिक कार्यक्रम की कार्ययोजना को मंजूरी देकर प्राथमिकताएं तय की जा सकें। आपको बता दें कि रक्षा मंत्रालय के तहत बीआरओ 2015 से सीमावर्ती इलाकों में दुर्गम जगहों को सडक़ से जोडऩे के काम में जुटा हुआ है। लेकिन, अब मंत्रालय ने फैसला किया है कि वह सशस्त्र बलों के साथ मिलकर बीआरओ के लिए प्राथमिकता के तहत प्लान तैयार करेगा। डिटेल प्रॉजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर काम होगा। साथ ही जिम्मेदारी तय करने के लिए काम की प्रगति पर ऑनलाइन नजर रखी जाएगी। डोकलाम में चीन से तनाव के बीच सीमावर्ती सडक़ों की हालत खराब होने की रिपोर्ट आई हैं। कई प्रॉजेक्ट काफी लेट हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत-चीन सीमा के पास जिन 73 सडक़ों की पहचान की गई थी, उनमें से सिर्फ 27 पूरे हो सके हैं, जबकि बाकी 2022 तक पूरे हो सकेंगे। पहले इनके 2012 तक पूरा होने का अनुमान था। इन 73 में से 61 सडक़ों को बनाने का जिम्मा बीआरओ को मिला है। मंत्रालय को उम्मीद है कि अधिकार बढ़ाने से काम में तेजी आएगी। बीआरओ को अब तक जो अधिकार दिए गए थे, उसके मुताबिक चीफ इंजिनियर 10 करोड़ और एडीजी 20 करोड़ रुपये तक के विभागीय कार्य को प्रशासनिक मंजूरी दे सकता है। अनुबंध के आधार पर होने वाले कामों के लिए डीजी की मंजूरी जरूरी थी, जो 50 करोड़ रुपए तक के काम को प्रशासनिक मंजूरी दे सकता था।
साभार-khaskhabar.com













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