देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा। जिले के गोवर्धन मुड़िया पूर्णिमा पर्व पर गोवर्धन में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अनूठा संगम रविवार सुबह देखने को मिला। आस्था के बीच न कोई बड़ा और न कोई छोटा। सभी श्रद्धालु एक भाव से समान नजर आये।
मुड़िया मेला के इस बार छह दिवसीय पर्व पर गोवर्धन धाम में शनिवार की रात्रि और रविवार की सुबह रिकाॅर्डतोड़ भीड़ रही। श्रद्धालु आस्था के आगे कंकड़-पत्थर की चुभन को भूल गये। दस से पंद्रह किमी0 ही पैदल चलकर फिर 21 किमी0 की परिक्रमा नंगे पैर लगाई। मुड़िया पूर्णिमा मेला में अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। जनसैलाब के बीच श्रद्धालुओं व आस्थावान भक्तों की अटूट श्रंखला दिखाई दी। समूचा मेला क्षेत्र कोसों दूर तक जनसैलाब ही जनसैलाब दिखाई दिया। मन में आस्था व श्रद्धा लिये लाखों श्रद्धालुओं ने जय-जयकारों के बीच परिक्रमा लगाई।
मुड़िया पूर्णिमा मेला की पूर्व संध्या पर रिकार्ड तोड़ भीड़ को देखकर प्रशासन भी सतर्क नजर आया। आज रविवार की सुबह 10 बजे गोवर्धन में पहली मुड़िया शोभायात्रा महंत राम कृष्ण दास महाराज के निर्देशन में राधा-श्याम सुंदर मंदिर से निकली। भक्ति के रस प्रवाह के बीच मुड़िया मेला में लाखों श्रद्धालुओं ने असुविधा के बीच मानसी गंगा के फुब्बारों के नीचे स्नान व आचमन किया। तमाम दिक्कतों के बाद भक्तों ने अपनी परिक्रमा का प्रथम पड़ाव दानघाटी मंदिर से शुरू किया और आन्यौर, पूंछरी, राधाकुंड होकर अंतिम पड़ाव मानसी गंगा पर पहुंचे। जहां प्रसिद्ध मुकुट मुखारविंद मंदिर में दर्शन किया। गिरिराज जी का अभिषेक किया। मंदिरों में भीड़ की तादाद इतनी थी कि पूजन की सामग्री को दूर से ही डालना पड़ा।













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