देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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श्री विज्ञानाचार्य जी महाराज के सानिध्य में एवं यमुना रक्षक दल के राष्टीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास जी के नेतृत्व में वाहन यात्रा हथिनीकुण्ड पहॅुची। हथिनीकुण्ड पहुॅच यमुना भक्तों द्वारा यमुना पूजन किया गया। यमुना रक्षक दल के कार्यकर्ता जब हथिनीकुण्ड पहॅुचे तब उन्होने देखा कि हथिनीकुण्ड के सारे कपाट बन्द है और ब्रज की ओर नाम मात्र जल भी नहीं छोड़ा जा रहा था। इस स्थिति तो देख यमुना भक्तों ने रोष प्रकट किया। 1994 के हथिनीकुण्ड जल समझौते के विरोध स्वरूप यमुना रक्षक दल के कार्यकर्ता द्वारा हथिनीकुण्ड के गेट खोला गया एवं जब तक यमुना रक्षक दल के कार्यकर्ता वहाॅ रहे तब तक विरोध स्वरूप बैराज के गेट खुले रहे।
यमुना रक्षक दल के राष्टीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास के ने बताया कि यमुना की समस्या की शुरूआत 1994 में हथिनीकुण्ड जल बंटवारे के समझौते हुअी है। यमुना का प्राकृतिक प्रवाह बाधित कर उसका 97 प्रतिशत हिस्सा वही रोक लिया गया है। यह कहाॅ का न्याय है कि किसी नदी का 97 प्रतिशत पानी को उसके प्राकृतिक पथ पर बहने से रोक लिया जाये। यदि पूर्व की सरकारों से हथिनीकुण्ड समझौते में गलती हुयी है तो वर्तमान सरकारों की यह जिम्मेदारी बनती है कि समझौते पर पुनर्विचार कर उसे रद्द किया जाये।
यमुना रक्षक दल के राष्टीय महासचिव रमेश सिसौदिया, स्वामी नारायण बाबा, श्रीदास प्रजापति ने कहा कि हथिनीकुण्ड पर यमुना के अविरल और निर्मल प्रवाह को देख जितनी प्रसन्नता हुयी उतना ही मन उदास होता है कि जिस ब्रज की यमुना पहचान है वहाॅ उसका यह निर्मल जल नहीं पहॅॅुच पा रहा हैं यमुना रक्षक दल इसके लिए सतत लडाई लड़ता रहेगा।
इस अवसर पर राजवीर सिंह, परशुराम गुर्जर, दयाराम गुर्जर, मदनलाल गौतम, मदनगिरि महाराज, श्रीदास प्रजापति, अजय शर्मा, ग्वाला बाबा, देवेन्द्र गुर्जर, आदि लोग उपस्थित रहे।













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