देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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आयुर्वेद के ग्रंथों में इसके गुणों की व्यापाक रूप से चर्चा की गई है और इसके सेवन को अत्यधिक फायदेमंद और बलदायक बताया गया है। अनानास एक रसदार फल है इसकी फांकें बहुत ही रसीली होती हैं, इसका मुरब्बे के तौर पर सेवन करें तो गर्मी के दिनों में पित्त की शिकायत नहीं होगी। अनानास कृमिनाशक है। अनानास के रस में प्रोटीन युक्त पदार्थो को पचाने की क्षमता होती है जो एसिडिटी में फायदा करती है। इसलिए एसिडिटी होने पर इसका सेवन करना चाहिए। अनन्नास मधुर, तृप्तिकारक व स्फूर्तिदायक फल है। इसमें कैल्शियम, फाइबर, मैग्रीनशियम और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पीलिया, उच्च रक्तचाप, यकृत दोष आदि रोगों में लाभकारी होता है। इसमें ब्रोमेलिन नामक एंजाइम भी पाया जाता है, जो प्रोटीन को पचाने, ब्रोंकाइटिस, एब्सेस न्यूमोनिया, गुर्दे का संक्रमण आदि में कार्य करता है। इससे शरीर की प्रतिरेाधक क्षमता भी बढती है। इससे गले को ठंडक मिलती है साथ ही गले के रोगों से बचाव होता है। यदि पेट में अजीर्ण हो तो पके अनन्नास के छोटे-छोटे टुकडे करके सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण लगाकर खाने से लाभ मिलता है। इस प्रकार अनन्नास ग्रहण करने से पेट के कृमि हफ्ते भर में निकल जाते हैं। जिन बच्चों को पेट में अक्सर कृमि हो जाते हैं, उन्हें उक्त प्रकार से अनन्नास अवश्य दें। अनन्नास में रक्त के हर दोष को दूर करने की क्षमता है, इसीलिए इसका सेवन करने व लेप लगाने से त्वचा में निखार आता है। अस्थमा के रोगियों को सुबह-दोपहर खाली पेट अनन्नास का रस लेने से फायदा होता है। अनियमित माहवारी हो, तो इसके रस का नियमित सेवन करेने से माहवारी सामान्य हो जाती है। शोधों के मुताबिक दिन में 3 बार अनन्नास खाने से बढती उम्र के साथ कम होती आंखों की रोशनी का खतरा कम हो जाता है।
साभार-khaskhabar.com












