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नई दिल्ली । कुलभूषण जाधव मामले में भारत को बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। वहीं, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। नीदरलैंड के हेग में अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ने जाधव को फांसी पर अंतरिम रोक लगा दी है। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पत्र लिखकर भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाने के लिए कहा है। भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी कुलभूषण जाधव को कथित जासूसी करने के आरोप में पिछले महीने पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।
अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत ने लगाई थी गुहार
भारत ने पाकिस्तानी सैन्य अदालत के इस फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत में 8 मई को अपील की थी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में कहा कि कुलभूषण जाधव को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और ना ही उन्हें भारत के उच्चायोग अधिकारियों से मिलने की इजाजत दी गई। जाधव की मां अवन्ति जाधव ने पिछले महीने पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत में जाधव की फांसी के खिलाफ याचिका दायर की थी। अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया कि उन्होंने जाधव की मां से बात कर उन्हें इस फैसले के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालत में जाधव मामले की पैरवी वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे कर रहे हैं।
पाक ने किया विएना समझौते का उल्लंघन
भारत ने अपनी अपील में पाकिस्तान पर विएना समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। भारत ने अपील में कहा कि रिटायर्ड अफसर को ईरान से किडनैप किया गया था जहां वह सेना से रिटायर होने के बाद व्यापारिक गतिविधियों में व्यस्त थे जबकि पाकिस्तान का दावा है कि भारतीय अधिकारी जाधव को 3 मार्च 2016 को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया। भारत ने अपनी अपील में यह भी कहा था कि जाधव की गिरफ्तारी के काफी समय बाद तक पाक ने कोई सूचना नहीं दी। भारत ने पाक की निंदा करते हुए कहा कि वह आरोपी के मानवाधिकारों की रक्षा करने में असफल रहा। भारतीय उच्चायोग ने जाधव की गिरफ्तारी के बाद कई बार जाधव से मिलने की इजाजत मांगी थी लेकिन पाकिस्तान ने भारत के सभी अनुरोधों को अस्वीकार करते हुए इजाजत नहीं दी। जाधव को जब पिछले महीने पाक सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी तो भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। भारत ने पाकिस्तान को गंभीर नतीजों की चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर जाधव को फांसी होती है तो भारत-पाक संबंधों को बड़ी क्षति पहुंचेगी। पाकिस्तानी सेना ने पिछले महीने एक बयान जारी किया था जिसमें कुलभूषण जाधव को जासूसी करने और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने का दोषी बताया गया था। पाक सेना प्रमुख कमर बाजवा के हस्ताक्षर किए हुए एक आदेश में कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
पाक का दावा था कि जाधव भारतीय नौसेना के लिए काम कर रहे थे और रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग में तैनात किए गए थे। पाक ने जाधव की गिरफ्तारी के बाद जाधव का कबूलनामा वाला एक विडियो भी जारी किया था। जाधव ने मैजिस्ट्रेट के सामने कबूला था कि वह रॉ के एक प्लान के तहत काम कर रहे थे और पाक के खिलाफ जासूसी कर रहे थे। भारत ने जाधव के रिटायर्ड भारतीय नौसेना अधिकारी होने की बात स्वीकार की है लेकिन भारत सरकार से किसी भी तरह से संबद्ध होने के पाक के आरोप को खारिज कर दिया था।
साभार-khaskhabar.com













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