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प्रत्याशी नहीं बल्कि गृहमंत्री और मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा पर है चुनाव

प्रत्याशी नहीं बल्कि गृहमंत्री और मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा पर है चुनावलखनऊ । राजधानी की उत्तर विधानसभा सीट से दो प्रमुख पार्टी के बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। इसमें एक देश के गृहमंत्री हैं तो दूसरा प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर। सपा सरकार में मौजूदा मंत्री अभिषेक मिश्रा यहां से एक बार फिर जीत दर्ज कराने के लिए जोर-शोर से प्रचार में लगे हैं, वहीं भाजपा प्रत्याशी डॉ. नीरज बोरा की जीत हार से सांसद राजनाथ सिंह की प्रतिष्ठा जुड़़ी है। 

दोनों के बीच प्रतिद्वंदिता के साथ ही बसपा प्रत्याशी अजय श्रीवास्तव की मजबूती से इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होगा। तीन प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवारों के अलावा छोटे दल व निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में डटे होने से इस क्षेत्र में जीत हासिल करना आसान नहीं है। महोना, लखनऊ पश्चिम, पूर्वी व मध्य के हिस्सों को जोड़कर वर्ष 2012 में नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर पार्टी की लहर के चलते सपा के प्रो. अभिषेक मिश्रा ने जीत हासिल कर क्षेत्र के पहले विधायक होने का सौभाग्य प्राप्त किया था। 

भाजपा के परंपरागत क्षेत्रों को जोड़कर बनी इस सीट पर उस समय कांग्रेस से प्रत्याशी डा. नीरज बोरा को दूसरा, भाजपा के आशुतोष टंडन गोपालजी को तीसरा व बसपा के अरुण द्विवेदी को चौथा स्थान मिला था। इस बार लखनऊ उत्तर का दूसरा विधानसभा चुनाव है और तीन प्रमुख राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों समेत 15 प्रत्याशियों में क्षेत्र की जनता अपना विधायक चुनेगी। ऐसे में जहां सपा ने वर्तमान विधायक व कैबिनेट मंत्री प्रो. अभिषेक मिश्रा को फिर से मैदान में उतारा है और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को गिनाकर दोबारा जीत हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए डॉ. नीरज बोरा को भाजपा, चुनाव मैदान में उतार कर इस सीट को अपनी झोली में डालने की कोशिश में लगी हुई है। इसके साथ ही बसपा की नीतियों से प्रभावित होकर वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए युवा नेता अजय श्रीवास्तव अज्जू को बसपा ने चुनाव मैदान में उतार कर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। इसके अलावा 12 निर्दलीय प्रत्याशी भी इस सीट से अपना भाग्य आजमा रहे हैं  

साभार-khaskhabar.com

 

नारद संवाद

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