देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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नई दिल्ली । पर्वतीय इलाकों में हुई भारी बर्फबारी से पहाडों के साथ-साथ मैदानों में भी पारे में भारी गिरावट दर्ज की गई। उत्तर पश्चिमी हवाओं के चलते मैदानी इलाकों में हाड कंपाने वाली ठंड पड रही है। उत्तरी राज्यों में शुक्रवार को शीतलहर का प्रकोप जारी रहने के बीच राष्ट्रीय राजधानी और जम्मू-कश्मीर में कुछ जगहों पर जनवरी के लिए न्यूनतम तापमान तीन साल में सबसे कम दर्ज किया गया, जबकि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कई जगहों पर पारा जमाव बिंदु से नीचे आ गया।
घने कोहरे के कारण आज सुबह के समय यातायात खासकर रेल सेवाएं प्रभावित हुईं, जिसमें 26 ट्रेनें विलंब से चल रही थीं। आठ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया और सात ट्रेनें रद्द कर दी गईं। हालांकि हवाई यातायात निर्बाध रूप से जारी रहा। क्षेत्रीय मौसम अनुमान केन्द्र के मुताबिक गुरुवार का न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री रहा जो पिछले तीन साल में जनवरी में सबसे कम है और यह इस मौसम का भी सबसे कम तापमान है। हिमाचल प्रदेश में आदिवासी और पहाड़ी इलाकों में ठिठुरन की स्थिति बनी रही और शीतलहर से शिमला ठिठुर गया, जहां कई स्थानों पर सातवें दिन बिजली गुल है। हालांकि जलापूर्ति आंशिक रूप से बहाल कर दी गई है।
जम्मू-कश्मीर में कई स्थानों पर इस सीजन का सबसे कम रात का तापमान दर्ज किया गया। पहलगाम का न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे 13 डिग्री सेल्सियस रहा जो जनवरी में तीन साल में सबसे कम है। वहीं, गुलमर्ग में चार साल में इस सीजन का सबसे कम रात्रि का तापमान दर्ज किया गया जो शून्य से नीचे 13.5 डिग्री सेल्सियस रहा। ठंड का आलम यह है कि उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर रिकॉर्ड तोड़ते हुए पारा चार डिग्री से नीचे रिकार्ड किया गया। ठंड के चलते उत्तर प्रदेश में 15 लोगों की मौत की सूचना है। गिरते पारे के साथ ही किसान परेशान होने लगे हैं। वहीं किसानों के मुताबिक आलू, मटर, सरसों की फसलें प्रभावित हो गई हैं।
सर्द हवाओं से गलन बढ़ी हुई है। हालांकि पिछले दो दिनों से तेज धूप खिल रही है लेकिन सर्द हवाओं के आगे धूप पस्त नजर आ रही है। लोगों को घरों के बाहर और भीतर ठिठुरन का अहसास हो रहा है। ठंड के चलते प्रदेश में नौ लोगों की मौत हो गई। कानपुर में न्यूनतम पारा लुढक़कर 2 डिग्री सेल्सियस आ गया। यह सामान्य (10 डिग्री) से करीब आठ डिग्री कम है। उत्तर-पश्चिम की हवाओं की गति बृहस्पतिवार को 4.4 किलोमीटर रही। इससे मैदानी क्षेत्रों में गलन बढ़ गई।
साभार-khaskhabar.com













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