देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreदेश पर जब भी संकट आया है, हर देशवासी अपने पूरे तन-मन से राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा है।देश पर आई विपदा के समय धर्म, जाति और राजनीतिक विचारधारा कोई मायने नहीं रखती। ऐसा ही एक उदाहरण है 1971 का, जब पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी थी, उस समय जनसंघ से सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने देश को सर्वोपरी रखा और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पाकिस्तान के हमले के खिलाफ संसद में तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी का खुलकर समर्थन किया था।
4 दिसम्बर 1971, जब लोकसभा में राष्ट्रीय संकट पर बोले अटल जी
4 दिसम्बर, 1971 को लोकसभा में अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं कि, “सभापति जी, हम एक राष्ट्रीय संकट की छाया में एकत्रित हुए हैं, पाकिस्तान ने हम पर युद्ध थोप दिया है। बांग्लादेश में मुक्ति वाहिनी की निरंतर सफलता से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए और इस भूखंड में अंतरराष्ट्रीय दबाव को आमंत्रित करने के लिए, पाकिस्तान ने हमारी सुरक्षा, अखंडता और स्वाधीनता को चुनौती दी है।”
अटल बिहारी वाजपेयी जी सरकार का समर्थन करते हुए आगे कहते हैं, “ये एक चुनौती भी है और महान अवसर भी। हम एक अग्नि परीक्षा से गुजर रहे हैं। कोई कारण नहीं है कि हम इस अग्नि परीक्षा से कुंदन बनकर न निकलें। न सिर्फ हम अपनी सीमा की रक्षा करें बल्कि पाकिस्तान के शासकों को ऐसा पाठ पढ़ाएं, जिसे वो जिंदगी भर न भूल सकें।”
देश के सामने उनके लिए पार्टी कितनी तुच्छ थी, उनके एक वाक्य से स्पष्ट हो जाता है। वे कहते हैं कि “आज मैं पार्टी की तरफ से बोलने को तैयार नहीं हूं। अब तो सारा देश एक पार्टी है। छोटी-छोटी बातों को भूलकर, राजनीतिक मतभेद छोड़कर, सभी को कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलना होगा।”
पाकिस्तान का अचानक देश पर एकतरफा हमला
आपको बता दें, उस समय पाकिस्तान ने अचानक देश पर एक तरफा हमला किया था। देश उस समय तैयार नहीं था, लेकिन संसद ने एकता का परिचय देकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया था। अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने भाषण में इस बात को रेखांकित करते हुए कहा था कि इस संकट की घड़ी में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश विजयी हो और एक इतिहास का निर्माण करे। उस वक्त प्रधानमंत्री कोई और नहीं श्रीमती इंदिरा गांधी जी थीं।
वो आगे कहते हैं कि , “मैं चाहता हूं कि इस आक्रमण के काल में ये पार्लियामेंट याह्या खां के खिलाफ एक हथियार के रूप में प्रयुक्त की जा सकती है। पाकिस्तान में पार्लियामेंट नहीं है, पाकिस्तान की सरकार को जनता का समर्थन नहीं है। यहां जनता के प्रतिनिधि बैठे हैं और दुनिया देख रही है और आगे भी देखेगी कि इस देश में संकट की घड़ी में एक होकर प्रत्युत्तर देने का सामर्थ्य है।













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