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हिमाचल मंत्रीमंडल में विस्तार की तैयारी, दावेदारों की धड़कनें तेज

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली जीत के बाद अब सत्तारूढ़ दल में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश मंत्रिमंडल में दो केबिनेट मंत्रियों के पद खाली हैं। जिन्हें भरने को लेकर खुद सीएम जय राम ठाकुर भी जल्द ही भरने को लेकर कह चुके हैं।

हिमाचल मंत्रिमंडल में केबिनेट मंत्री किशन कपूर के लोकसभा चुनावों में जीत के बाद दिये इस्तीफे और दूसरे मंत्री अनिल शर्मा के त्यागपत्र देने से दो पद खाली हुये थे। हाल ही में धर्मशाला व पच्छाद विधानसभा उपचुनावों में मिली जीत के बाद मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर राजनैतिक तौर पर मजबूत हुये हैं। हालांकि इससे पहले पार्टी के कुछ विधायक उन्हें आंखे दिखा रहे थे। जिनमें प्रमुख तौर पर ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला सामने आये थे। धवाला ने सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाते हुये भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया था।

दरअसल, धवाला की भी अंदरखाते मंत्री बनने की हसरत रही है। लेकिन उनके साथ लगते हल्के से विधायक बिक्रम ठाकुर के केबिनेट मंत्री बनने से उनकी दावेदारी कमजोर हुई है। हालांकि पार्टी ने उन्हें वाईस चैयरमेन बनाकर उनके तेवरों को ठंडा करने की कोशिश की है। धवाला इस बात को लेकर भी परेशान हैं कि उनके चुनाव क्षेत्र में संगठन मंत्री पवन राणा का दखल दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

प्रदेश मंत्रिमंडल में होने वाले विस्तार पर इस समय रमेश धवाला के अलावा विधानसभा के मौजूदा स्पीकर राजीव बिंदल,नुरपूर के विधायक राकेश पठानिया और नरेन्दर बरागटा की नजर है। यही नहीं मौजूदा मंत्रीमंडल में हमीरपुर व बिलासपुर जिलों को कोई प्रतिनिधत्व नहीं मिला है। और यहां से भी दावेदारी जताई जा रही है। यही वजह है कि मामला पेचीदा होता जा रहा है। लेकिन पार्टी के सूत्रों का मानना है कि अब इस मामले में कोई देर नहीं होगी। और नवंबर माह में छह तारीख को धर्मशाला में होने जा रही इन्वेस्टर मीट में प्रधानमंत्री नरेन्दर मोदी के दौरे के बाद प्रदेश मंत्रीमंडल में विस्तार होगा। इसके लिये संगठन में भी इन दिनों चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। फिलवक्त चुनावों में जीत के बाद सीएम जय राम ठाकुर मजबूत होकर उभरे हैं,तो अब उन पर दवाब बनाने वाले अब उस हैसियत में नहीं हैं कि वह खुलकर कुछ बोल सकें। हालांकि चुनावों से पहले जय राम ठाकुर अपनी ही पार्टी के नाराज नेताओं से खासी चुनौती मिल रही थी। उपचुनावों से पहले संगठन मंत्री पवन राणा और ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला के बीच तकरार से अच्छा खासा विवाद पैदा हुआ था। जिससे पार्टी में बगावत का खतरा पैदा होने लगा था। चूंकि धवाला जहां आरोप लगा रहे थे,कि संगठन मंत्री उनके कामकाज में दखल दे रहे हैं,वहीं राणा ने कहा था कि धवाला मंत्री बनने की चाह में ही बेवजह बवाल पैदा कर रहे हैं।

पार्टी में उस समय बने महौल में पहले तो धर्मशाला से प्रत्याशी के तौर पर प्रेम कुमार धूमल का नाम उछाला गया तो फिर पार्टी के एक गुट की ओर से बार बार कहा गया कि उपचुनावों के बाद पार्टी में बदलाव होगा और अगले सीएम के तौर पर धूमल सत्तासीन होंगे। विधानसभा चुनावों में धूमल सुजानपुर से चुनाव हार गये थे। व उसके बाद जय राम ठाकुर को सीएम की कुर्सी मिली। हार के बाद से धूमल अपने राजनैतिक पुर्नवास की बाट जोह रहे हैं। लेकिन चुनाव परिणामों ने धूमल के मंसूबों पर भी पानी फेर दिया है।

नियमों के तहत प्रदेश में मंत्रियों की तादाद 12 से अधिक भी नहीं हो सकती। ऐसे हालात में दो ही मंत्री बनेंगे। तो जाहिर है कि दावेदारों में भी बैचेनी बढ़ी है। देखना होगा कि अब किसकी लाटरी लगती है।

 साभार-khaskhabar.com

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