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सावन सूखे, भादों हरे

मथुरा। ब्रज में कहावत है न सावन सूखे, न भादौं हरे, लेकिन इस बार कान्हा की नगरी में सावान सूखा निकला तो भादौं में हर ओर हरियाली आच्छादित हो गई है। भादौं में घुमड़ घुमड़ कर आने वाले मेघा जमकर बरस भी रहे हैं।


बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरों पर रौनक है। इससे मौसम तो खुशगवार हुआ ही, वहीं लोगों को गर्मी से भी राहत मिली है। सोमवार शाम से शुरू हुई झमाझम बारिश शुरू हुई। गुरूवार तक आसामान बादलों से अच्छादित था। कभी झमाझम तो कभी बूंदाबांदी का दौर जारी थी।

खेत इस बीच कई बार पानी से भर गये लेकिन भू गर्भीय जल बहुत ज्यादा नीचे खिसक जाने से खेतों में भरा पानी ज्यादा समय तक नजर नहीं आता है। खरीफ की फसल के लिए संजीवनी बनकर बरसी इस बारिश से शहर ताल तलैया बन गया। इससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।


जून माह में शुरू हुई छिटपुट बारिश ने खरीफ की बुवाई के दौरान तो बरसना ही छोड़ दिया था। जून में औसत 10 मिमी वर्षा दर्ज हुई। वहीं जुलाई के शुरूआत में केवल 71.6 मिमी वर्षा हुई थी। इससे खरीफ की फसल बो चुके किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रहीं थी।

उनकी बोई हुई फसल खेतों में ही सूखने लगी थी। मंहगे डीजल और बिजली के चलते नलकूप से सिंचाई आसान नहीं थी, वहीं हर किसी को राजवाह माइनर का पानी नसीब नहीं हो पाता। ऐसे में यह बारिश किसानों के लिए नई आस बनकर बरसी है। इससे उनकी खरीफ की फसल को संजीवनी मिली है। सोमवार से अगले 26 घंटों में करीब 30 मिमी बरसात दर्ज की गई।

इससे सभी फसलों को ही फायदा होगा। वहीं शहर के कामकाजी लोगों के लिए बारिश आफत बन गई। हालांकि उमस भरी गर्मी में उन्हें राहत तो मिली लेकिन शहर के नए एवं पुराने बस स्टैंड पर और दोनों रेलवे पुलों के नीचे जलभराव हो गया। कई स्थानों पर नाले चोक हो जाने से रास्तों पर पानी भर गया। उन इलाकों के दुकानदारों के लिए भी इससे आफत हो गई।
 

नारद संवाद

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