देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। ज्वांइट मजिस्टेªट आईएएस दीक्षा जैन बताया कि विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति है। अन्य देशों की संस्कृतियां तो समय की धारा के साथ-साथ नष्ट होती रही हैं, किन्तु भारत की संस्कृति आदि काल से ही अपने परम्परागत अस्तित्व के साथ अजर अमर बनी हुई है। इसकी उदारता तथा समन्यवादी गुणों ने अन्य संस्कृतियों को समाहित तो किया है, किन्तु अपने अस्तित्व के मूल को सुरक्षित रखा है। तभी तो पाश्चात्य विद्वान् अपने देश की संस्कृति को समझने हेतु भारतीय संस्कृति को पहले समझने का परामर्श देते हैं।
दीक्षा जैन जानकारी दी कि कुम्भ पूर्व वैष्णव बैठक वृन्दावन के सांस्कृतिक ग्राम के मंच पर होने वाले कार्यक्रम तीन मार्च को राई लोकनृत्य झांसी नीलम चैहान, मयूर नृत्य फूलों की होली दानी शर्मा, निर्गुण कबीर गयान प्रयागराज विवके विशाल के साथ शुरू होंगे चार मार्च को निर्गुण कबीर गायन गोरखपुर पवन राज पंक्षी, दीवारीध्पाई गायन बांदा चन्द्रपाल सिंह, रामलीला अध्योध्या सजीवन मिश्रा, रासलीला वृन्दावन स्वामी अवधेश शर्मा, पांच मार्च को आल्हा लोकगयान महोबा शरद अनुरागी, फाग गायन जगदीश ब्रजवासी, कृष्णा नृत्य नाटिका विनय कृष्ण, रासलीला राम शर्मा, छह मार्च को फाग गायन रामेश्वर दयाल शर्मा, रागिनी पारूल शर्मा सहारनपुर, दीवारीध्पाई डण्डा बांदा अहिल्या कुशवाहा, ब्रज के लोक नृत्य फूलों की होली मुरारी लाल शर्मा, रासलीला बांके बिहारी शर्मा, सात मार्च को अवधी लोकगायन संतोष शिप्रा लखनऊ, लोक नाटय नौटंकी संतोष कुमार कौशाम्बी, ब्रज के लोक नृत्यध्मयूर नृत्य पूजा माहौर, कृष्ण भवन आस्था गोस्वामी, रासलीला देवकी नन्दन शर्मा तथा आठ मार्च को चरकुला दिनेश शर्मा, रसिया दंगल मनोज शर्मा हाथरस, संजय शर्मा अतरौली अलीगढ़, ब्रज लोकगीत गायन माधुरी शर्मा तथा रासलीला देवकी नन्दन शर्मा द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।













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