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लखनऊ। नगर निगम गृहकर, जलकर व सपत्ति कर बढ़ाने की तैयारी में है। आठ साल पहले करों का पुर्ननिधारण किया गया था। नगरीय निकायों की आय में बढ़ोत्तरी को लेकर शासन ने प्रत्येक दो वषों में सपत्ति कर, गृहकर व जलकर आदि के पुर्ननिधारण किए जाने को लेकर आवश्यक निर्देश दिए है। इसके लिए नगर निगम अधिनियम की उपविधि में आवश्यतानुसार संशोधन करने की कार्रवाई किए जाने को शासन ने कहा है। स्थानीय निकायों को उत्तर प्रदेश सरकार ने जल्दी से जल्दी गृहकर की दरों का पुनरीक्षण करने और शहरी क्षेत्र के सभी मकानों को कर के दायरे में लाने का निर्देश दिया है। सरकार ने स्थानीय नगरीय निकायों को कहा है कि गृहकर, सपति कर व जलकर का पुनरीक्षण कर अपने वित्तीय संसाधनों को मजबूत करें जिससे कि बेहतर जन सुविधाएं दी जा सकें।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकायों में ज्यादातर ने बीते पांच सालों से अपने गृह कर की दरों का पुनरीक्षण नहीं किया है। इसके चलते नगरीय निकायों की आमदनी में बढ़त न के बराबर हो रही है। अधिकांश स्थानीय निकाय जन सुविधाओं के नाम पर खर्च कर पाने की स्थिति में ही नही हैं। लखनऊ नगर निगम की स्थिति भी ऐसी ही है। यहां तक कि नगर निगम अपने वेतन भत्तों के मद के लिए भी राज्य सरकार पर निर्भर है। विशेष सचिव रमाकांत पांडेय ने स्थानीय निकाय निदेशालय व समस्त नगर निगमों को इस बाबत पत्र लिखा है। इसके मुताबिक मुख्य सचिव के आदेश के अंतर्गत प्रदेश की सभी नगर निकायों की आय में नियमित वृद्धि के लिए सपत्ति करए जलकर व गृहकर आदि के पुनर्निधरण की कार्रवाई कई वर्षो से नहीं की गई है। जिससे निकायों के वित्तीय स्त्रोतों में बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है और विकास कार्य प्रभावित हैं।
साभार-khaskhabar.com













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