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जिले में भयावह अकाल के हालात, राज्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट

जिले में भयावह अकाल के हालात, राज्यमंत्री ने मांगी रिपोर्टबाड़मेर। अकाल का स्थायी डेरा कहलाने वाला मरुस्थलीय बाड़मेर जिला इस बार फिर से भीषण अकाल की आग में झुलस रहा है। राज्य सरकार को राहत कार्य प्रारंभ करने के लिए जिस ग्राउंड रिपोर्ट का इंतजार है, उसके लिए उर्दू अकादमी अध्यक्ष असरफ अली ने जिला कलक्टर को पत्र लिखा है। अपने पत्र में ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान आई बातों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में चारे-पानी के अभाव में पशुधन विशेषकर गौवंश दम तोड़ने लगा है। जिले में जैसे हालात बने हुए हैं, उसे देखते हुए लोगों के लिए एक-एक दिन निकालना भारी हो रहा है। पशुपालकों के सामने पशुओं को चारा-दाना खिलाना तो दूर, पानी तक पिलाने के लाले पड़ने लगे हैं। 28 हजार 387 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा भू-भाग में फैले बाड़मेर जिले के 2442 गांवों को खुद राज्य और केन्द्र सरकार अकालग्रस्त मान चुकी है। सरकार ने इसकी बाकायदा घोषणा भी कर दी है। लेकिन वर्तमान विक्रम संवत् 2074 का करीब एक माह बीत जाने के बावजूद अकाल राहत कार्यों की मंजूरी सरकार से नहीं आई है। अब राज्य मंत्री असरफ अली ने जिला कलक्टर से ग्राउंड रिपोर्ट मांगी है। राज्य मंत्री अली जल्द से जल्द अकाल राहत कार्य प्रारंभ करवाने की गुहार सरकार से लगा चुके हैं।

बाड़मेर में बने अकाल के ताजा हालात में सरकार के ढीले रवैये के चलते पशुधन खासकर गौवंश के लिए जीवन बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। गांव-ढाणियों में पीने का पानी नहीं मिलने के कारण गौवंश के दम तोड़ने की विचलित करने वाली तस्वीरें सामने आने लगी हैं। पशुपालकों के लिए परिवार को पालना मुश्किल हो रहा है, वे खुद पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में पशुधन का भगवान ही मालिक है। सीमावर्ती जिले में मानसूनी बारिश में अभी कम से कम दो-ढाई महीने तक और इंतजार करना होगा। तब तक गोवंश सहित अन्य पशुधन का संरक्षण करना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली है। 

साभार-khaskhabar.com

 

नारद संवाद

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