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Read Moreदेश के 8 दिव्यांग जल्द ही तीन विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे और इसके लिए उन्हें भारतीय सेना प्रशिक्षित कर रही है। यह टीम दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर जाने, मालदीव के खुले समुद्र में स्कूबा डाइव करने और दुबई में पैरा जंपिंग करने के विश्व रिकॉर्ड बनाएगी। इन्हें भूमि, वायु और जल प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी भारतीय सशस्त्र बलों के दिग्गजों के एक समूह ने ली है। समूह के सदस्य टीम को स्काई डाइविंग, स्कूबा डाइविंग और पर्वतारोहण में प्रशिक्षित कर रहे हैं।
दिव्यांगों की टीम दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर को जायेगी
दिव्यांगों की टीम का नेतृत्व करने वाले पूर्व पैरा अधिकारी मेजर विवेक जैकब ने कहा कि इस साल मई में 8 दिव्यांगों की एक टीम दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर को जायेगी। मेजर जैकब ने विशेष बलों के दिग्गजों के संगठन 'कॉन्कर लैंड एयर वाटर' की स्थापना की है जो दिव्यांगों को इस चुनौती भरे कार्य को संभव बनाने में मदद कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने सियाचिन ग्लेशियर में ‘भूमि विश्व रिकॉर्ड’ बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र माना जाने वाला सियाचिन ग्लेशियर पृथ्वी पर सबसे कठोर इलाकों में से एक है। वहां का तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे रहता है। यहां पहुंचकर दिव्यांगों की टीम विश्व रिकॉर्ड कायम करेगी।
मालदीव और दुबई में बनाएंगे दूसरी और तीसरा रिकॉर्ड
पूर्व पैरा अधिकारी मेजर विवेक जैकब ने बताया कि सियाचिन ग्लेशियर पर पहुंचने के बाद दिव्यांग टीम की योजना मालदीव के खुले समुद्र में एक और रिकॉर्ड बनाने की है। वहां वे अगस्त में स्कूबा डाइव का प्रयास करेंगे। इसके बाद वे दिसम्बर तक दुबई में पैरा जम्पिंग करके तीसरा विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे।
हादसे के बाद दोबारा कुछ करने का जज्बा
मेजर जैकब ने 'कॉन्कर लैंड एयर वाटर' (सीएलएडब्ल्यू) के गठन के बारे में बताया कि इसके गठन की नींव तब पड़ी, जब 2015 में एक लड़ाकू स्काईडाइव के दौरान पैराशूट में खराबी आने की वजह से उन्हें रीढ़ की हड्डी में चोट लगी। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान वह भारतीय वायु सेना के अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट भदुरिया से मिले। वह भी एक दुर्घटना के बाद स्थायी रूप से लकवाग्रस्त होकर चार साल से व्हीलचेयर पर थे।
वायुसेना अधिकारी ने मेजर जैकब से पूछा कि क्या वह कभी स्कूबा ड्राइव कर सकते हैं, इस पर मैंने उनसे वादा किया कि कर सकते हैं। इसके बाद सीएलएडब्ल्यू का गठन करके इस दिशा में प्रयास शुरू किए गए। मेजर जैकब बताते हैं कि संगठन ने पुडुचेरी में पीएलएडब्ल्यू के लिए एक स्कूबा प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है। उन्होंने कहा कि सीएलएडब्ल्यू प्रशिक्षण देने के लिए पुणे और चंडीगढ़ में सेना के पैरापेलिक रिहैबिलिटेशन सेंटर के साथ औपचारिक रूप से जुड़ने की प्रक्रिया में है। हमारे पास प्रशिक्षण लेने के लिए आने वाले लोगों में दिव्यांग सैनिकों के अलावा बुजुर्ग भी हैं लेकिन यह उनकी व्यक्तिगत क्षमता है। उन्होंने कहा कि हम इसे संस्थागत बनाने की प्रक्रिया में हैं क्योंकि इससे दिव्यांगों की क्षमता को और निखारा जा सकता है।













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