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प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर विजन पर आधारित है यह योजना

घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात बिलों में कटौती करने के लिए, केंद्र सरकार ने साल 2021 के फरवरी माह में एक ऐसी योजना पेश की जिसका उद्देश्य घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पादों से बढ़ती बिक्री पर कंपनियों को आर्थिक प्रोत्साहन देना है। इस योजना का नाम प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना है। इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि सरकार इन पूंजी गहन क्षेत्रों में निवेश करना जारी नहीं रख सकती। इन क्षेत्रों को रिटर्न देने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है। इसकी जगह  हम भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी के साथ वैश्विक कंपनियों को आमंत्रित कर सकते हैं और यह योजना इसी लक्ष्य पर केंद्रित है।

घरेलू निर्माताओं को होगा लाभ

भारत में उत्पादन की स्थिति मजबूत करने के लिए विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करने के अलावा, इस योजना का उद्देश्य घरेलू कंपनियों की मौजूदा उत्पादन  इकाइयों को स्थापित करने एवं उनका विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इन क्षेत्रों में श्रम की मांग बहुत अधिक होती है और उम्मीद है कि यह योजना भारत के रोजगार योग्य कर्मचारियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। इस योजना से घरेलू निर्माताओं को लाभ होगा, रोजगार सृजन में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं के लिए सस्ते उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे। इस योजना से दोनों कुशल और गैर-कुशल कर्मियों के लिए 20,000 प्रत्यक्ष और 80,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान लगाया गया है।

कुछ दिनों पहले ही खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को किया गया शामिल 

शुरुआत में केंद्र सरकार ने मोबाइल निर्माण के साथ-साथ दवा सामग्री और चिकित्सा उपकरणों के लिए पीएलआई योजना शुरू की। इस योजना से मोबाइल संबंधित उपकरणों को 1 अप्रैल को जोड़ा गया था। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माण के लिए पीएलआई  योजना का  4 से 6 प्रतिशत आवंटित करने की योजना है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां जो मोबाइल फोन और ट्रांजिस्टर, डायोड, थाइरिस्टर, रेसिस्टर्स, कैपेसिटर जैसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण करती हैं इस योजना के अंतर्गत आती हैं। फार्मास्युटिकल्स और मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियां भी पीएलआई योजना का लाभ उठा सकती है। कुछ दिनों पहले ही सरकार ने इस योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को 10,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। 

प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर विजन पर आधारित है यह योजना

सरकार का लक्ष्य उत्पादन-जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दायरे में विस्तार करना है, जिसमें पहले से शामिल मोबाइल फोन एवं उससे संबंधित उपकरण, दवा सामग्री और चिकित्सा उपकरणों के अलावा दस से अधिक सेक्टर जैसे खाद्य प्रसंस्करण और वस्त्र शामिल हैं। आयात पर कटौती के अलावा, पीएलआई योजना घरेलू बाजार में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन पर आधारित है। अगर यह योजना प्रभावशाली तरीके से लागू की जाती है तो जल्द ही भारत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ दूसरे देशों के लिए भी सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरेगा।

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