देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreभारत सरकार ने 2019 और 2020 के लिए गांधी गांधी शांति पुरस्कार की घोषणा कर दी है। संस्कृति मंत्रालय ने घोषणा की है कि वर्ष 2019 के लिए ओमान के (दिवंगत) सुल्तान रहे कबूस बिन सैद अल सईद को गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। जबकि वर्ष 2020 के लिए बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। शेख मुजीबुर रहमान को बांग्लादेश में राष्ट्र जनक का दर्जा प्राप्त है।
दोनों देशों ने जताया भारत का आभार
इस सम्मान के बाद ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी ने भारत का आभार व्यक्त किया है। जबकि बांग्लादेश के विदेश मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "बांग्लादेश सरकार बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान को मरणोपरांत गांधी शांति पुरस्कार 2020 प्रदान करने के भारत सरकार के फैसले के लिए गहरी कृतज्ञता के साथ स्वीकार करती है।"
पीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की जूरी इस पुरस्कार के लिए व्यक्ति का चयन करती है। जूरी की पिछली बैठक 19 मार्च को हुई थी। जूरी ने सर्वसम्मति से ओमान के दिवंगत सुल्तान कबूस बिन अल सईद और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान का नाम इस पुरस्कार के लिए चुना है।
अब तक सम्मानित हुए व्यक्ति
इसके पहले यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पाने वालों में तंजानिया के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जूलियस न्येरे, जर्मनी के संघीय गणराज्य के डॉ. गेरहार्ड फिशर, रामकृष्ण मिशन, बाबा आम्टे (श्री मुरलीधर देवदास आम्टे), दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. नेल्सन मंडेला, बांग्लादेश ग्रामीण बैंक, दक्षिण अफ्रीका के आर्कबिशप डेसमंड टूटू, श्री चंडी प्रसाद भट्ट और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के नाम शामिल हैं। हाल के विजेताओं में साल 2015 में विवेकानंद केंद्र, साल 2016 में संयुक्त रूप से अक्षय पात्र फाउंडेशन, भारत और सुलभ इंटरनेशनल, 2017 में एकल अभियान ट्रस्ट और साल 2018 में जापान के श्री योही ससाकावा जैसे प्रख्यात लोगों के नाम शामिल हैं।
1995 से हुई शुरुआत
भारत सरकार ने इस पुरस्कार की शुरुआत 1995 में की थी। इस पुरस्कार के तहत पट्टिका के अलावा एक करोड़ रुपये की राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार अहिंसा व अन्य गांधीवादी तरीकों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए दिया जाता है। राष्ट्रीयता, नस्ल, भाषा, जाति, धर्म आदि से परे जाकर सभी को इस सम्मान के योग्य माना गया है।













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