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Read Moreनई दिल्ली। विक्रम लैंडर (Vikram lander) अपने तय स्थान से करीब 500 मीटर दूर चांद की जमीन पर गिरने से इसरो ( ISRO) निराश नहीं हुआ है। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। इसरो ने बताया कि विक्रम सुरक्षित है और कोई भी टूट-फूट नहीं हुई है। इसरो के अधिकारी ने बताया कि हम लैंडर के साथ संचार को फिर से स्थापित करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अगर उससे संपर्क स्थापित हो जाए तो वह वापस अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
इसरो से मिली जानकारी के अनुसार, चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर में वह टेक्नोलॉजी है कि वह गिरने के बाद भी खुद को खड़ा कर सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उसके कम्युनिकेशन सिस्टम से संपर्क हो जाए और उसे कमांड रिसीव हो जाए।
विक्रम लैंडर में ऑनबोर्ड कम्प्यूटर है। यह खुद ही कई काम कर देता हैं। विक्रम लैंडर के गिरने से वह एंटीना दब गया है जिसके जरिए कम्युनिकेशन सिस्टम को कमांड भेजा जा सकता था। अभी इसरो वैज्ञानिक यह प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह उस एंटीना के जरिए विक्रम लैंडर को वापस अपने पैरों पर खड़े होने की कमांड दे सके।
इसरो प्रमुख के. सिवन ने बताया था कि इसरो की टीम लैंडर विक्रम से कम्युनिकेशन स्थापित करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही संपर्क स्थापित हो जाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक उनके पास विक्रम से संपर्क साधने के लिए 11 दिन हैं।
एक अनुमान के अनुसार क इसरो के पास विक्रम से संपर्क साधने के लिए 11 दिन हैं। क्योंकि अभी लूनर डे चल रहा है। एक लूनर डे धरती के 14 दिनों के बराबर होता है। इसमें से 3 दिन बीत गए हैं। 11 दिनों तक चांद पर दिन रहेगा। इसके बाद चांद पर रात हो जाएगी, जो पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होती है।
साभार-khaskhabar.com













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