देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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इंदौर। मध्यप्रदेश के सबसे बडे अस्पताल इंदौर के एम वाय हॉस्पिटल में 24 घंटे में 17 मरीजों की मौत हो गई। इनमें से 11 मरीजों की मौत 12 घंटे में हुई। बुधवार रात आठ बजे से लेकर गुरुवार सुबह आठ बजे के बीच इस अस्पताल में 11 मरीजों की मौत हो गई। इन 11 मरीजों में से 7 मरीजों की मौत आधे घंटे के अंतराल यानी सुबह 4 बजे से 4.30 बजे के बीच हुई। मरीजों के परिजन आरोप लगा रहे हैं कि अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन की सप्लाई रुक गई थी जिसकी वजह से मरीजों की मौत हुई है। वहीं अस्पताल प्रशासन इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। जिन मरीजों की मौत हुई, उनमें से कुछ तो वेंटिलेटर पर थे। अस्पताल में अपने पिता का इलाज कराने आए एक शख्स का कहना है कि 22 जून की रात में ऑक्सीजन की सप्लाई अचानक बाधित हो गई जिसकी वजह से उनके पिता की मौत हुई है।
एमवाय अस्पताल के अधीक्षक बीएस पाल का कहना है कि सभी मौतें उनकी नहीं हुई हैं जो ऑक्सीजन पर थे। बीएस पाल का कहना है कि उनके पास 40 वेंटीलेटर हैं। उन्होंने कहा कि सभी वेंटिलेटर पर मरीज हैं, अगर ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होती तो सभी पर होती। अस्पताल प्रशासन ने मीडिया को मरीजों की लिस्ट देने से इंकार कर दिया। अस्पताल प्रशासन का ये रूख सवालों के घेरे में है। वहीं कांग्रेस इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हॉस्पिटल में जिस प्लांट से 350 मरीजों तक ऑक्सीजन सप्लाय की जाती है, उसकी कमान 24 घंटे सिर्फ एक व्यक्ति के हाथ में रहती है। अगर वह व्यक्ति इस दौरान कहीं चला जाए या सो जाए तो ऑक्सीजन खत्म होने पर सप्लाई रुक सकती है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि यहां रोज एवरेज 10-15 मौतें होती हैं। लेकिन एक साथ 17 मौतें होना आम बात नहीं है।
साभार-khaskhabar.com













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