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पटना । राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष में हलचल बढ गई है। बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को बीजेपी ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में उतारकर जो मास्टरस्ट्रोक मारा है, उससे विपक्षी पार्टियों की एकजुटता में दरार पडती दिखाई दे रही है। ज्ञातव्य है कि बसपा प्रमुख मायावती ने भी रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की बात कही है, क्योंकी कोविंद दलित नेता है। साथ ही जेडी (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के कोविंद के प्रति नरम रवैये से कांग्रेस परेशान है। ज्ञातव्य है कि बिहार में जेडी (यू), आरजेडी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को कोविंद के बिहार में अच्छे कार्यकाल के बारे में बताया था।
इससे कांग्रेस की बैचेनी और बढ गई है। वहीं आज नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में नीतीश अपने पत्ते खोल सकते हैं। हांलांकि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि नीतीश एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के खिलाफ नहीं जाएंगे। वहीं कांग्रेस इस बात को लेकर चिंतित है कि अगर नीतीश कुमार ने कोविंद को समर्थन किया तो विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार खडा करने की कोशिशों को धक्का लग सकता है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद रमजान के एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पटना गए हुए है। माना जा रहा है कि वे आज सीएम नीतीश कुमार से भेंट कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि आजाद नीतीश से विपक्षी एकता बरकरार रखने की अपील करेंगे। ज्ञातव्य है कि नीतीश कुमार ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे मामलों में बीजेपी साथ दिया। साथ ही सेना द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक पर अंगुली उठाने वालों से नीतीश ने सवाल किए।
साभार-khaskhabar.com













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