देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreभारतीय टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा और अमेरिका की उनकी जोड़ीदार बेथानी माटेक सैंड्स ने डेसिरे क्राउजिक और एलेक्सा गुआराची की छठी वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराकर उलटफेर करते हुए बीते गुरुवार को यहां विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के महिला युगल के दूसरे दौर में जगह बनाई। सानिया और बेथानी ने पहले दौर के मुकाबले में अमेरिका और चिली की जोड़ी को एक घंटा और 27 मिनट में 7-5 6-3 के अंतर से हराया। इस जोड़ी पर मैच की शुरुआत में ही दबाव आ गया, जब तीसरे गेम में बेथानी की सर्विस पर सात बार ड्यूस हुआ। अमेरिकी खिलाड़ी ने तीन डबल फॉल्ट किए लेकिन तीन ब्रेक प्वाइंट बचाने के बाद अपनी सर्विस भी बचा ली।
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सानिया और बेथानी को भी विरोधी की सर्विस तोड़ने का मौका मिला जब अमेरिकी खिलाड़ी ने नेट पर वॉली पर अंक बनाने का मौका गंवा दिया। बायें हाथ की खिलाड़ी डेसिरे ने इसके बाद शानदार सर्विस करते हुए अपनी सर्विस बचाई। एलेक्सा ने 12वें गेम में 15-30 पर सर्विस करते हुए फोरहैंड से बाहर मारकर विरोधी जोड़ी को दो सेट प्वाइंट दिए और फिर इसके बाद सानिया ने स्मैश के साथ पहला सेट जीत लिया।
दूसरे सेट में सानिया और बेथानी ने एक बार फिर एलेक्सा की सर्विस तोड़कर 3-1 की बढ़त बनाई जिसके बाद इस जोड़ी को सेट और मैच जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई।
मिश्रित युगल में आज रोमांचक मुकाबला
अंकिता रैना शुक्रवार को रामकुमार रामनाथन के साथ उतरेंगी। यहां उनका मुकाबला उनके हमवतन सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की हमवतन जोड़ी से होगा। यह पहली बार होगा कि जब किसी ग्रैंडस्लैम के मुख्य ड्रॉ में दो भारतीय महिला खिलाड़ी खेलेंगी। यह मैच भारतीय समयानुसार शाम 4:50 से शुरू होगा।
अंकिता लगातार तीसरे ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट में खेल रही हैं। उन्होंने इसी साल आस्ट्रेलियाई ओपन के साथ ग्रैंडस्लैम में पदार्पण किया था, जबकि सानिया मिर्जा वर्ष 2005 से ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
अंकिता और सानिया की जोड़ी टोक्यो ओलम्पिक में भी देखने को मिलेगी। खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें बधाई देते अपने ट्विटर अकाउंट पर शुभकामनाएं दीं।
https://twitter.com/KirenRijiju/status/1410789699820527622
इससे पहले भारतीय-अमेरिकी शिखा ओबेरॉय ने वर्ष 2004 में अमेरिकी ओपन के महिला एकल के लिए क्वालीफाई किया था और जापान की साओरी ओबाता के खिलाफ पहले दौर का मुकाबला जीता भी था लेकिन इसके बाद वीनस विलियम्स से हार गईं थी। शिखा इसके बाद कभी ग्रैंडस्लैम के मुख्य ड्रॉ में जगह नहीं बना सकी।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों में निरूपमा वैद्यनाथन वर्ष 1998 में ऑस्ट्रेलियाई ओपन में जगह बनाने के बाद ग्रैंडस्लैम मुख्य ड्रॉ में खेलने वाली पहली महिला एकल खिलाड़ी बनी थीं।
बोपन्ना-शरण पहले दौर में बाहर
भारत की ओर से एक अन्य मुकाबले में रोहन बोपन्ना और दिविज शरण पुरूष युगल वर्ग के पहले दौर में एडुआर्ड रोजर वेसलीन और हेनरी कोटिनेन से 6-7, 4-6 से हारकर बाहर हो गए। इन दोनों ने टोक्यो ओलंपिक के लिये जोड़ी बनाई थी लेकिन क्वालीफाई नहीं कर सके।













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