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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दुशांबे के 3 दिवसीय दौरे पर रवाना, एससीओ की बैठक में लेंगे हिस्सा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ताजिकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए हैं। यह वार्षिक बैठक 27-29 जुलाई को दुशांबे में होनी है। ताजिकिस्तान इस वर्ष एससीओ देशों की मंत्रिस्तरीय और आधिकारिक स्तर की बैठकों की श्रृंखला की मेजबानी कर रहा है।

28 जुलाई को रक्षा मंत्री रखेंगे भारत का पक्ष

इस वार्षिक बैठक में एससीओ सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग के मुद्दों पर चर्चा की जानी है। विचार-विमर्श के बाद एससीओ के सदस्य देशों की ओर से साझा बयान जारी किये जाने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 28 जुलाई को बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए सदस्य देशों को संबोधित करेंगे। दुशांबे की अपनी यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री अपने ताजिक समकक्ष कर्नल जनरल शेराली मिर्जो से भी मिलकर द्विपक्षीय मुद्दों और आपसी हित के अन्य मुद्दों पर चर्चा करेंगे

 

अफगानिस्तान-तालिबान तनाव के बीच महत्वपूर्ण बैठक

बता दें कि जुलाई के दूसरे सप्ताह में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के परिषद् और अफगानिस्तान पर एससीओ संपर्क समूह की बैठक हुई, जिसमें भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हुए थे। उन्होंने अफगानिस्तान के अपने समकक्ष मोहम्मद हनीफ अतमर से ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में मुलाकात करके अफगानिस्तान में हालिया घटनाक्रम पर चर्चा की है। यह महत्वपूर्ण बैठकें ऐसे समय में हो रही है, जब तालिबानी लड़ाके अफगानिस्तान के अधिकतर इलाकों को तेजी से अपने नियंत्रण में ले रहे हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। भारत ने अफगान बलों और तालिबान लड़ाकों के बीच भीषण लड़ाई के मद्देनजर कंधार स्थित अपने वाणिज्य दूतावास से लगभग 50 राजनयिकों एवं सुरक्षा कर्मियों को एक सैन्य विमान के जरिए निकाला है।

क्या है शंघाई सहयोग संगठन?

शंघाई सहयोग संगठन एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो कि यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसका उद्देश्य संबंधित क्षेत्र में शांति, सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखना है। इसकी स्थापना 15 जून, 2001 को शंघाई में हुई थी। वर्तमान में इसके सदस्य देशों में कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं।

भारत-ताजिकिस्तान संबंध

भारत और ताजिकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों ने सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर दोनों देशों के सहयोग के कारण काफी विकास किया है। भारत ने अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा फारखोर ताजिकिस्तान में स्थापित किया है। इसके अलावा साल 2018 में भारत ने ताजिकिस्तान को विकास कार्यों के लिए दो करोड़ डॉलर की सहायता राशि देने की घोषणा की थी। इसके अलावा भारत और ताजिकिस्तान के बीच रक्षा व्यापार निवेश, पर्यटन, स्वास्थ्य के साथ ही राजनीतिक संबंध , रणनीतिक रिसर्च, कृषि, ऊर्जा , अंतरिक्ष, तकनीक, युवा मामलों, संस्कृति और डिजास्टर मैनेजमेंट पर पर भी आपसी सहमती है।

नारद संवाद

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