BREAKING NEWS

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

कोशिश है कि इमेज को काम पर हावी न होने दूं :तमन्ना भाटिया

मुंबई। अभिनेत्री तमन्ना भाटिया 16 साल से अभिनय कर रही हैं। वे साउथ की टॉप एक्ट्रैस में से एक है। तमन्ना को लगता है कि किसी विशेष इमेज को अपने काम पर हावी नहीं होने देना चाहिए। तमन्ना ने अपने अभिनय की शुरूआत 2005 में 15 साल की उम्र में हिंदी फिल्म 'चांद सा रोशन चेहरा' से की थी। उसी वर्ष, उन्होंने 'श्री' के साथ तेलुगु में अपनी शुरूआत की और अगले वर्ष उन्होंने 'केडी' के साथ तमिल में अपनी शुरूआत की।

तमन्ना ने आईएएनएस को बताया, "मैं एक व्यक्ति के रूप में हर अलग समय पर विकसित हुई हूं। मैंने लगातार काम किया है, इसलिए मेरे लिए, मेरा अधिकांश जीवन उन फिल्मों में विभाजित है, जिन पर मैंने काम किया है। मैं इसका आनंद लेती हूं। मेरे लिए, यह उतना ही नया है जितना कि यह पहले दिन था"

तमन्ना का मानना है कि एक इमेज को तोड़ने की प्रक्रिया अब चुनौतीपूर्ण हो गई है।

"वास्तव में, यह अब बहुत अधिक चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मुझे लगता है कि लनिर्ंग की निरंतर आवश्यकता है, और जब आप एक ऐसा काम करने जा रहें हो जिसकी पहले से ही एक इमेज विकसित है, तो वह काम काम आपके लिए और चुनौतिपूर्ण हो जाता है। ऐसे में आपको अपने काम के ऊपर उस इमेज को हावी नहीं होने देना है, बल्कि एक नई इमेज क्रिएट करनी है।"

तमन्ना, जिन्हें हाल ही में डिज्नी प्लस हॉटस्टार वीआईपी पर वेब सीरीज 'नवंबर स्टोरी' में देखा गया था, अब हिंदी थ्रिलर 'अंधाधुन' के तेलुगु रीमेक के लिए तैयार हैं। तेलुगु संस्करण का निर्देशन मेरलापाका गांधी ने किया है।


साभार-khaskhabar.com

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको  ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

Read More