BREAKING NEWS

मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-4036474

अनोखा रहा इस वर्ष का अन्तिम चन्द्रग्रहण

भारत में आज पूर्ण चन्द्र ग्रहण दिखाई दिया, जो सायंकाल 6.20 पर खत्म हो गया। अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में पूर्ण ग्रहण के साथ चंद्रोदय सबसे पहले देखा गया। साल का आखिरी चंद्र ग्रहण ईटानगर में 4.38 मिनट पर दिखाई दिया। राजस्थान की राजधानी जयपुर में यह सायं 5.41 पर लगा और सायंकाल 6.20 मिनट पर समाप्त हो गया। इसी के साथ सूतक काल भी समाप्त हो गया।

चंद्र ग्रहण की समाप्ति पर स्वयं और घर का शुद्धिकरण करें। जल में गंगा जल डालकर स्नान करें। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के बाद पूरे घर को पानी में नमक डालकर धोना चाहिए और घर के देवी-देवताओं को भी स्नान करवाएं। विधिवत पूजा पाठ करें। चंद्र ग्रहण के बाद दान का बहुत महत्व है। मान्यता है कि इसकी समाप्ति पर चंद्रमा से संबंधित सफेद चीजें जैसे - चावल, दही, मोती, वस्त, दूध, मिठाई, आदि का दान करना चाहिए।

क्यों खास रहा आज का चंद्र ग्रहण?
आज वाला चंद्र ग्रहण एक पूर्ण चंद्र ग्रहण था। इस दौरान पृथ्वी की छाया ने चंद्रमा के प्रकाश को पूर्ण रूप से ढक लिया। प्रकाश का विशेष प्रभाव चंद्रमा पर पडऩे के कारण यह चंद्रमा लाल रंग का नजर आया, जिसे ब्लड मून भी कहा जाता है।

पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में होते हैं और पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में होती है। इस वजह से पृथ्वी की परछाई से चंद्रमा पूरी तरह ढक जाता है और चंद्रमा पूरी तरह से काला हो जाता है। इसी को पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं।

आंशिक चंद्र ग्रहण की घटना तब होती है जब पृथ्वी की परछाईं चंद्रमा के पूरे भाग को नहीं ढक पाती है। इस दौरान चंद्रमा के हिस्से में अंधेरा जैसा प्रतीत होता है।

साभार-khaskhabar.com

 

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्वतंत्रता सेनानी पं. हुकम सिंह गौतम की पुण्यतिथि मनाई

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More