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हरेकृष्ण महताब पहले आजादी के लिए फिर लोकतंत्र को बचाने के लिए गए जेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख सेनानी, संविधान सभा के सदस्य तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के  नेताओं में से एक और ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे डॉ हरेकृष्ण महताब द्वारा लिखित पुस्तक ‘ओडिशा इतिहास’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि डॉ हरेकृष्ण महताब ने आजादी की लड़ाई में अपना जीवन समर्पित किया और जेल की सजा काटी। सबसे महत्वपूर्ण ये रहा कि आजादी की लड़ाई के साथ-साथ ही वह समाज के लिए भी लड़े। इतना ही नहीं, जिस पार्टी से वो मुख्यमंत्री बने थे, आपातकाल में उसी पार्टी का विरोध करते हुए वो जेल गए थे।
 
 
इस अवसर पर पीएम ने कहा कि करीब डेढ़ वर्ष पहले हम सब ने ‘उत्कल केसरी’ हरेकृष्ण महताब की एक सौ बीसवीं जयंती मनाई थी। आज हम उनकी प्रसिद्ध किताब ‘ओडिशा इतिहास’ के हिन्दी संस्करण का लोकार्पण कर रहे हैं। ओडिशा का व्यापक और विविधताओं से भरा इतिहास देश के लोगों तक पहुंचे, यह बहुत आवश्यक है।
 
ऐसे नेता जो देश की आजादी और लोकतंत्र को बचाने के लिए गए जेल
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि माहताब जब ओडिशा के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए। सत्ता में पहुंचकर भी वो अपने आप को पहले स्वतंत्रता सेनानी मानते थे और वो जीवन पर्यन्त स्वाधीनता सेनानी रहे ये बात आज के जनप्रतिनिधियों को हैरत में डाल सकती है कि जिस पार्टी से वो मुख्यमंत्री बने थे, आपातकाल में उसी पार्टी का विरोध करते हुए वो जेल गए थे। मोदी ने कहा कि वह ऐसे विरले नेता थे जो देश की आजादी के लिए भी जेल गए और देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए भी जेल गए थे।
 
कृष्ण महताब ने इतिहास बनाया भी, बनते देखा भी और उसे लिखा भी
 
पीएम ने कहा कि यह पुस्तक ऐसे साल में प्रकाशित हुई है जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इसी साल उस घटना को भी 100 साल पूरे हो रहे हैं, जब हरे कृष्ण महताब कॉलेज छोड़कर आजादी के आंदोलन से जुड़ गए। उन्होंने  कहा कि हरेकृष्ण महताब ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने इतिहास बनाया भी, बनते देखा भी और उसे लिखा भी। वास्तव में ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व बहुत कम होते हैं। माहताब की उन्मुक्त कंठ से सराहना करते हुए मोदी ने आगे कहा कि ऐसे महापुरुष खुद भी इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय होते हैं।
 
“ओडिशा इतिहास' पढ़ ली तो ओडिशा को जान लिया”
 
पीएम मोदी ने कहा कि अगर आपने महताब की 'ओडिशा इतिहास' पढ़ ली तो आपने ओडिशा को जान लिया, ओडिशा को जी लिया। इतिहास केवल अतीत का अध्याय ही नहीं होता, बल्कि भविष्य का आईना भी होता है। इसी विचार को सामने रखकर आज देश अमृत महोत्सव में आजादी के इतिहास को फिर से जीवंत कर रहा है। पाइक संग्राम, गंजाम आंदोलन और लारजा कोल्ह आंदोलन से लेकर सम्बलपुर संग्राम तक, ओड़िशा की धरती ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ क्रांति की ज्वाला को हमेशा नई ऊर्जा दी। ओडिशा के हमारे आदिवासी समाज के योगदान को कौन भुला सकता है? हमारे आदिवासियों ने अपने शौर्य और देशप्रेम से कभी भी विदेशी हुकूमत को चैन से बैठने नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन के महान आदिवासी नायक लक्ष्मण नायक जी को हमें जरूर याद करना चाहिए। 
 
 
ओडिशा के अतीत को खंगालें तो उसमें ओडिशा के साथ-साथ पूरे भारत की ऐतिहासिक सामर्थ्य के भी दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में लिखित ये सामर्थ्य वर्तमान और भविष्य की संभावनाओं से जुड़ा हुआ है, भविष्य के लिए हमारा पथ प्रदर्शन करता है।

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