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महामारी के बावजूद पिछले साल प्रत्यक्ष कर संग्रह में हुआ 5% का इजाफा

कोविड महामारी की चुनौतियों के बावजूद देश में पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2020-21 के अनंतिम प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगभग 5% की वृद्धि हुई है, जो हालात के सुधरने का सबूत है।  प्रत्यक्ष कर संग्रह में निगम कर और व्यक्तिगत आयकर शामिल होते हैं। 31 मार्च को राजस्व सचिव तरुण वाजपेयी ने कहा था कि मार्च में  जीएसटी संग्रह में हुई बढ़ोत्तरी इस बात का संकेत है की प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) संग्रह में भी सकारात्मक बदलाव होगा। 
 
 
अग्रिम कर संग्रह में भी हुई बढ़ोत्तरी
 
वित्त वर्ष 2020-21 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह के अंतिम आंकड़े बताते हैं कि शुद्ध संग्रह 9.45 लाख करोड़ रुपये रहा है। शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में निगम कर (सीआईटी) के रूप में 4.57 लाख करोड़ रुपये और सुरक्षा लेन-देन टैक्स (एसटीटी) समेत व्यक्तिगत आयकर (पीआईटी) के रूप में 4.88 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं। शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 2020-21 के 9.05 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर संशोधित अनुमान का 104.46 प्रतिशत रहा है। एक बेहद चुनौतीपूर्ण वर्ष के बावजूद, वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अग्रिम कर संग्रह 4.95 लाख करोड़ रुपये रहा है और इसमें पिछले वित्त वर्ष के 4.64 लाख करोड़ रुपये के अग्रिम कर संग्रह की तुलना में लगभग 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है।
 
 किन कारणों से बढ़ा कर संग्रह

EY INDIA में टैक्स पार्टनर समीर कानाबर कहते हैं कि, ‘विवाद से विश्वास’ स्कीम, तकनीक/डिजिटल का प्रयोग और टैक्स आधार का विस्तार करना (TDS में बदलाव) इस बार बढ़े हुए प्रत्यक्ष कर संग्रह के मुख्य कारण हैं। वो आगे कहते हैं कि महामारी के साल में प्रत्यक्ष कर संग्रह में बढ़ोतरी होना बताता है कि अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है। 
 
 
किस टैक्स (कर) की कितनी हिस्सेदारी
 
प्रत्यक्ष करों का सकल संग्रह (रिफंड के लिए समायोजन से पहले) वित्त वर्ष  2020-21 के लिए 12.06 लाख करोड़ रुपये रहा है। इसमें निगम कर (सीआईटी) के रूप में 6.31 लाख करोड़ रुपये और सुरक्षा लेन-देन टैक्स (एसटीटी) समेत व्यक्तिगत आयकर (पीआईटी) के रूप में 5.75 लाख करोड़ रुपये; अग्रिम कर के रूप में 4.95 लाख करोड़ रुपये; स्रोत पर टैक्स कटौती (केन्द्रीय टीडीएस समेत) के रूप में 5.45 लाख करोड़ रुपये; स्व-मूल्यांकन कर के रूप में 1.07 लाख करोड़ रुपये; नियमित मूल्यांकन कर के रूप में 42,372 करोड़ रुपये; लाभांश वितरण कर के रूप में 13,237 करोड़ रुपये तथा अन्य छोटे मदों के तहत कर के रूप में 2,612 करोड़ रुपये शामिल हैं। 
 
रिफंड मद में भी हुआ इजाफा
 
वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान रिफंड के रूप में 2.61 लाख करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में रिफंड के रूप में 1.83 लाख करोड़ रुपये जारी किये गए थे। इस प्रकार, रिफंड के मद में भी पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले लगभग 42.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
 
उपरोक्त आंकड़े अभी तक अनंतिम (प्रविशनल) हैं और संग्रह के अंतिम आंकड़ों की तुलना के बाद बदलाव संभव है।

नारद संवाद

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