देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले छह महीने से भी अधिक समय से चल रहा किसान आंदोलन एक बार फिर करवट ले रहा है। कोरोना संकट में किसान आंदोलन की ओर से लोगों का ध्यान हट गया था। किसानों के बीच इस आंदोलन की चर्चा कम हो गई थी।
आंदोलन चल रहा है अथवा स्थगित कर दिया गया है, इस तरह के जिज्ञासा भी लोग जाहिर कर रहे थे। दूसरी ओर कोराना के फैलाव में किसान आंदोलन की भूमिका पर भी चर्चा होने लगी। इसी बीच किसान संगठनांे ने एक बार फिर आंदोलन को धार देने और किसानों को एकजुट करने के उपक्रम शुरू कर दिये हैं।
किसान संगठन 26 मई को काला दिवस मनाएंगे। इस दौरान सरकार की कृषि नीतियों का विरोध किया जाएगा। जगह जगह पुतले फूंकने के कार्यक्रम रखे गये हैं। दिल्ली बार्डर पर छह महीने से भी अधिक समय से किसान संगठन तीन कृषि कानूनों को वापस लिये जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के आगरा मंडल उपाध्यक्ष गजेन्द्र गावर ने बताया कि राष्ट्रीय आह्वान पर मांट और जावरा मंे संगठन विरोध प्रदर्शन करेगा। सरकार के प्रतिनिधियांे और भाजपा के जनप्रतिनिधियों को काले झंडे दिखाए जाएंगे। सरकार की हठ के विरोध मंे पुतला दहन किया जाएगा। किसानांे से गांव गांव जाकर संगठन के कार्यकर्ता संपर्क कर रहे हैं।













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